नयी दिल्ली, 10 दिसंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि नवीन ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण (नोएडा) के अधिकारियों की मिलीभगत से किसानों को उनकी जमीन के बदले अधिक मुआवजा दिए जाने से जुड़े मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी को पिछले 10-15 वर्षों के दौरान प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) रहे व्यक्तियों व अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की भी जांच करनी चाहिए।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने इसी के साथ विशेष जांच दल (एसआईटी) को अपनी जांच पूरी करने के लिए और दो महीने का समय दे दिया।
नोएडा की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वह इस मामले में प्राधिकरण का पक्ष रखने के लिए हलफनामा दाखिल करना चाहते हैं।
उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जिन किसानों को अधिक मुआवजा दिया गया है, उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
अपनी जमीन के लिए कथित तौर पर अधिक मुआवजा पाने वाले एक किसान की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने कहा कि उनके मुवक्किल को बयान दर्ज कराने के लिए एसआईटी से बार-बार नोटिस मिल रहे हैं।
दवे ने पीठ से आग्रह किया, ‘‘कृपया किसानों की रक्षा करें, क्योंकि इसमें उनकी कोई गलती नहीं है।’’
पीठ ने कहा कि उसने अपने पिछले आदेशों में स्पष्ट किया है कि जांच का उद्देश्य किसानों को परेशान करना नहीं है, बल्कि उन अधिकारियों की मिलीभगत की जांच करना है, जिन्होंने अधिक भुगतान किया।
पीठ ने एसआईटी की ओर से दायर वस्तुस्थिति रिपोर्ट रिपोर्ट को रिकॉर्ड में लिया, जिसमें जांच पूरी करने के लिए तीन महीने का समय देने का अनुरोध किया गया है।
शीर्ष अदालत ने 13 अगस्त को नोएडा के अधिकारियों के खिलाफ एसआईटी जांच का आदेश दिया था, जिन पर बिल्डरों के साथ मिलीभगत करके जमीन मालिकों को उनके हक से अधिक मुआवजा देने का आरोप है।
उच्चतम न्यायालय ने एसआईटी के निष्कर्षों को स्वीकार कर लिया था, जिसमें आरोपों में प्रथम दृष्टया सच्चाई पाई गई थी।
उसने भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के वरिष्ठ अधिकारी एसबी शिरडकर की अध्यक्षता वाली एसआईटी की सिफारिशों को उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को सौंपने का निर्देश दिया था, जिन्हें इसे मंत्रिपरिषद के समक्ष रखने के लिए कहा गया था, ताकि नोएडा को ‘महानगर परिषद’ में परिवर्तित करने पर विचार किया जा सके।
एसआईटी की जांच के निष्कर्षों को गंभीरता से लेते हुए उच्चतम न्यायालय ने तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों वाली एक नयी एसआईटी का गठन किया था, जिसका उद्देश्य फॉरेंसिक जांच और आर्थिक अपराध शाखा के विशेषज्ञों की मदद से नोएडा के दोषी अधिकारियों और अनियमितताओं से लाभान्वित होने वाले अन्य लोगों के बैंक खातों व संपत्तियों की जांच करना था।
शीर्ष अदालत ने कहा था, ‘‘उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) पिछली एसआईटी की ओर से चिह्नित किए गए मुद्दों की जांच के लिए आईपीएस कैडर के तीन पुलिस अधिकारियों वाली एक एसआईटी का गठन करेंगे…।’’
भाषा संतोष पारुल
पारुल
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