नयी दिल्ली, 10 दिसंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी में दोषियों की सजा में छूट और समयपूर्व रिहाई से संबंधित नीतियों के कार्यान्वयन की निगरानी और पर्यवेक्षण के लिए कार्यवाही शुरू कर दी।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी हालिया निर्देशों के अनुपालन में स्वतः संज्ञान लेते हुए याचिका शुरू की।
उच्चतम न्यायालय ने चार नवंबर को संबंधित उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों से स्वतः संज्ञान लेते हुए रिट याचिका दर्ज करने का अनुरोध किया और उसके बाद, संबंधित राज्यों की सजा में छूट और समय से पहले रिहाई नीतियों के कार्यान्वयन की निगरानी और पर्यवेक्षण के लिए एक खंडपीठ का गठन किया जाएगा। इस संबंध में प्रगति की जानकारी उच्च न्यायालय द्वारा हलफनामे के माध्यम से दी जाएगी…।
उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसरण में, उच्च न्यायालय ने कहा कि स्वतः संज्ञान याचिका में दिल्ली की छूट और समयपूर्व रिहाई नीतियों के कार्यान्वयन की निगरानी और पर्यवेक्षण शामिल होगा।
पीठ ने दिल्ली सरकार को दोषियों की सजा में छूट और समय से पहले रिहाई से संबंधित वर्तमान नीतियों के बारे में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
पीठ ने कहा कि हलफनामे में इस विषय पर जारी किए गए किसी भी परिपत्र, नियम, विनियम, सरकारी आदेश या वैधानिक प्रावधानों को भी शामिल किया जाना चाहिए।
दिल्ली सरकार के गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को दो सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करना होगा। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 13 जनवरी, 2026 को तय की है। उसने इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ अग्रवाल को न्यायमित्र नियुक्त किया है
उच्चतम न्यायालय ने असम, हिमाचल प्रदेश, मेघालय, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल राज्यों में माफी और समय से पहले रिहाई की नीतियों को लागू करने में विफलता पर असंतोष व्यक्त करने के बाद ये निर्देश पारित किए थे।
भाषा शोभना प्रशांत
प्रशांत
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
