नयी दिल्ली, 30 नवंबर (भाषा) भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने सरकार से हरित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष वित्त संस्थान और प्रौद्योगिकी कोष बनाने की अपील की है। इससे देश में लंबे समय वाली और कम लागत वाली पूंजी की उपलब्धता बढ़ेगी।
सीआईआई ने कहा कि भारत जल्द ही 5,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है, और ऐसे में हरित अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाना अब कोई विकल्प नहीं बल्कि रणनीतिक जरूरत बन गया है।
उद्योग मंडल ने अपने बजट पूर्व सुझावों में एक विशेष हरित वित्त संस्थान (जीएफआई) बनाने का प्रस्ताव रखा है, जो नवीकरणीय ऊर्जा, स्वच्छ परिवहन, हरित भवन और औद्योगिक कार्बन उत्सर्जन में कमी के लिए बड़े पैमाने पर कम लागत वाली पूंजी जुटाए।
एक बयान के मुताबिक, ‘‘यह संस्था गुजरात के गिफ्ट सिटी में स्थित हो सकती है, ताकि नियामक लचीलापन का लाभ लिया जा सके और विदेशी पूंजी आकर्षित की जा सके। यह रियायती कर्ज, इक्विटी समर्थन, ऋण गारंटी और छोटी हरित परिसंपत्तियों के प्रतिभूतिकरण की सुविधा देकर परियोजना वित्तपोषण की लागत कम कर सकता है।’’
इसने भारत के हरित प्रौद्योगिकी नवाचार को दुनिया भर में ले जाने के लिए एक हरित प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी कोष बनाने की भी मांग की है। यह कोष हरित प्रौद्योगिकी बनाने वाली भारतीय कंपनियों को वैश्विक टिकाऊ और प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी में हिस्सा लेने में मदद करेगा।
भाषा पाण्डेय अजय
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