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Wednesday, 14 January, 2026
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‘आपके हाथ खून से सने हैं’: बंगाल में ‘39 SIR मौतों’ को लेकर TMC का EC प्रमुख पर हमला

टीएमसी नेताओं ने CEC से पूछा SIR का ‘असल मकसद’ क्या है, कहा, सीमा वाले राज्यों को बाहर रखना बताता है कि यह घुसपैठ रोकने वाली जांच नहीं.

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नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार से मुलाकात की और उन्हें बताया कि उनके “हाथ खून से सने हैं”—क्योंकि पश्चिम बंगाल में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया से जुड़ी कम से कम 39 मौतों, जिनमें चार बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) भी शामिल हैं, की जिम्मेदारी उन्हीं की है.

लोकसभा के पांच और राज्यसभा के पांच सांसदों वाले इस टीएमसी दल ने दिल्ली में चुनाव आयोग की पूरी बेंच से करीब डेढ़ घंटे तक मुलाकात की.

मुलाकात के बाद टीएमसी के राज्यसभा सांसद और फ्लोर लीडर डेरेक ओ’ब्रायन ने पत्रकारों से कहा, “हमने बैठक की शुरुआत इस बात से की कि सीईसी के हाथ खून से सने हैं. हमने पांच सवाल उठाए.” टीएमसी सांसदों को अपनी बात रखने के लिए 40 मिनट मिले, जिसके बाद कुमार करीब एक घंटे तक बोले.

डेरेक ओ’ब्रायन ने जोर देकर कहा कि टीएमसी को SIR की अवधारणा पर आपत्ति नहीं है, “लेकिन हमें उस अव्यवस्थित और निर्मम तरीके पर कड़ा ऐतराज है, जिसमें सीईसी और चुनाव आयोग अपना काम कर रहे हैं—पूरी तरह संवेदनहीन होकर.”

बैठक में टीएमसी ने उन लोगों की सूची भी सौंपी जिन पर SIR का असर पड़ा है. पार्टी के अनुसार, SIR के चलते 39 लोगों की मौत हुई है, जिनमें चार बीएलओ भी हैं. इसके अलावा, 15 बीएलओ तनाव और दबाव के कारण बीमार पड़े हैं और इलाज करवा रहे हैं.

टीएमसी के एक सांसद ने बैठक में पूछा, “इन जानों का जिम्मेदार कौन होगा? चुनाव आयोग या सीईसी ज्ञानेश कुमार? बीएलओ को न पर्याप्त ट्रेनिंग दी गई, न कोई सहारा, उन्हें अव्यवहारिक डेडलाइन दी गईं, उन पर लगातार दबाव डाला गया और आखिरकार कई लोग बीमार पड़कर या मरकर गिर गए. क्या इन ‘टाली जा सकने वाली’ मौतों का खून मुख्य चुनाव आयुक्त के हाथ पर नहीं है?”

सूत्रों के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल द्वारा उठाए गए पांच सवालों में से एक SIR के “असल मकसद” पर था. टीएमसी ने आरोप लगाया कि बंगालियों को वोटर लिस्ट साफ करने के नाम पर निशाना बनाया जा रहा है और पार्टी 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले ‘बांग्ला पहचान’ को अपना प्रमुख मुद्दा बनाएगी.

बाद में टीएमसी की लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा ने चुनाव आयोग के कार्यालय के बाहर कहा कि सीईसी ने उन मौतों के बारे में “अनभिज्ञता” जताई, जिन्हें विपक्ष “अमानवीय दबाव” का नतीजा बता रहा है.

मोइत्रा ने पूछा, “अगर घुसपैठ मुद्दा है, तो त्रिपुरा, मेघालय, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड और मणिपुर जो बांग्लादेश और म्यांमार की सीमा से लगे हैं, उन्हें इस प्रक्रिया से बाहर क्यों रखा गया? यहां तक कि असम में भी ईसीआई ने SIR लागू नहीं किया, बल्कि ‘स्पेशल रिवीजन’ के नाम पर बस दिखावटी कदम उठाया.”

आयोग द्वारा घोषित SIR का दूसरा चरण 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहा है, जिनमें उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे चुनावी राज्य शामिल हैं.

असम में भी 2026 की शुरुआत में चुनाव हैं, पर ईसीआई ने इस SIR चरण से राज्य को अलग रखा, यह कहते हुए कि वहां कानून के तहत नागरिकता के अलग प्रावधान लागू हैं और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एनआरसी की प्रक्रिया पहले से चल रही है.

इसके बजाय, असम में चुनाव आयोग ने एक अलग स्पेशल रिवीजन का आदेश दिया है, जिसमें बीएलओ घर-घर जाकर सत्यापन करेंगे, लेकिन SIR जैसी पूरी प्रक्रिया नहीं होगी.

टीएमसी ने यह दलील भी दी कि अगर वही वोटर लिस्ट, जिन्हें अब चुनाव आयोह खुद संदिग्ध बता रहा है, 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए “ठीक” थीं, तो अब वे गलत कैसे हो गईं?

मोइत्रा ने पूछा, “अगर ये लिस्ट इतनी अविश्वसनीय हैं, तो इन वोटर्स द्वारा चुनी गई लोकसभा को क्यों न भंग कर दिया जाए?”

टीएमसी सांसदों ने बूथ लेवल एजेंट्स (बीएलए) की नियुक्ति के नए नियम पर भी सवाल उठाया. पहले बीएलए को उसी बूथ का पंजीकृत मतदाता होना ज़रूरी था, जहां वह नियुक्त होता था.

नए नियम में बीएलए उसी विधानसभा क्षेत्र के किसी भी बूथ से हो सकते हैं. प्रतिनिधिमंडल ने पूछा, “क्या यह पक्षपात और राजनीतिक झुकाव की बू नहीं देता? क्या यह आपके संवैधानिक अधिकार को कमजोर नहीं करता?”

टीएमसी ने यह भी कहा, “बंगाल में बीजेपी के नेता दावा कर रहे हैं कि एक करोड़ वोटरों के नाम लिस्ट से हटाए जाएंगे. चुनाव आयोग ने इन बयानों पर कोई ध्यान नहीं दिया, न ही इस तरह की भय फैलाने वाली राजनीति का खंडन किया. इससे दो सवाल उठते हैं, क्या चुनाव आयोग बीजेपी के इशारे पर काम कर रहा है? क्या हर पवित्र प्रक्रिया अब एक पार्टी के एजेंडे के हिसाब से बदली जाएगी?”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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