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Thursday, 8 January, 2026
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राम मंदिर पर धर्म ध्वजा के लिये सिख गुरुओं और उनकी पीढ़ियों ने दी कुर्बानी : योगी

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लखनऊ, 25 नवंबर (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कहा कि अयोध्या में राम मंदिर के शिखर पर फहराये गये भगवा झंडे के लिये सिख गुरुओं और उनकी पीढ़ियों ने अपनी जान की कुर्बानी दी थी।

आदित्यनाथ ने सिखों के नौवें गुरु, गुरु तेग बहादुर के 350वें शहीदी दिवस के मौके पर लखनऊ में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज अयोध्या में एक भव्य समारोह में श्रीराम जन्मभूमि पर भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण कार्य पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भारत की सनातन परंपरा के भगवा ध्वज का आरोहण मंदिर के शिखर पर किया। यह वही भगवा ध्वज है, जिसकी रक्षा के लिए सिख गुरुओं ने पीढ़ी दर पीढ़ी अपना बलिदान किया।

उन्होंने कहा, ”सन् 1510 से लेकर सन् 1515 के बीच प्रथम गुरु श्री गुरु नानक देव जी महाराज अयोध्या धाम में भगवान श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन के लिए आए। सन् 1528 में विदेशी आक्रांता बाबर के सिपहसालार के द्वारा मंदिर को तोड़ दिया गया। उस समय बाबर के अत्याचार को देखकर गुरु नानक देव जी महाराज ने बाबर को जाबर कहकर उसके कृत्यों का दृढ़ता के साथ विरोध किया था।”

मुख्यमंत्री ने कहा, ”जब भी श्रीराम जन्मभूमि के लिए संघर्ष हुए, सिख गुरु, योद्धा, निहंग, संतगण, राजा एवं सामान्य नागरिक स्वयं को बलिदान करने में पीछे नहीं हटे।”

उन्होंने कहा, ”अयोध्या के बारे में हम सभी को स्मरण रखना चाहिए कि कई साम्राज्य व पीढ़ियां आईं और गयीं, लेकिन आस्था अडिग रही। यही आस्था अयोध्या में 500 वर्षों के बाद पुनः श्रीराम जन्मभूमि पर भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर के निर्माण के महायज्ञ की साक्षी बनी है। वही आस्था गुरु तेग बहादुर जी के शहीदी दिवस पर देखने को मिल रही है। करीब 350 वर्षां के बाद भी प्रत्येक सिख एवं सनातनी गुरु तेग बहादुर जी महाराज, भाई मतिदास, भाई सती दास तथा भाई दयाल दास के प्रति अपनी कृतज्ञता ज्ञापित कर अपनी आस्था को व्यक्त कर रहा है।”

आदित्यनाथ ने कहा, ”आज का दिन हम सभी को प्रेरणा देता है। गुरु तेग बहादुर जी के समय औरंगजेब जैसा क्रूर बादशाह मनमानी कर रहा था। देश में धर्मान्तरण की एक मुहिम चला रहा था। तिलक को मिटाने एवं जनेऊ को समाप्त करने के उद्देश्य से उसने देशभर में अत्याचार किये। कश्मीर में उसका अत्याचार अपनी पराकाष्ठा पर पहुंच गया था, वहां औरंगजेब का सिपहसालार शेर अफगान खान अत्याचार कर रहा था। पीड़ित कश्मीरी पंडित कृपाराम को कहीं शरण न मिलने पर उन्होंने गुरु तेग बहादुर जी के समक्ष याचना की।”

उन्होंने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह तमाम यातनाओं के बावजूद अपने धर्म व संकल्प से नहीं डिगे। जब हम इतिहास के उन क्रूर क्षणों का स्मरण करते हैं तब लगता है उस समय गुरु परंपरा ने न केवल यातनाएं सही, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर यातना एवं क्रूरता का जवाब देने के लिए स्वयं को तैयार भी किया।

मुख्यमंत्री ने कहा, ”गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज ने मात्र नौ वर्ष की उम्र में अपने गुरु एवं पिता को खोया। उनके चार साहिबजादे सनातन की रक्षा करने के लिए बलिदान हो गए। गुरु गोबिंद सिंह महाराज शहीद पिता के पुत्र और शहीद पुत्रों के पिता थे। दुनिया में ऐसे उदाहरण बहुत कम देखने को मिलते हैं।”

आदित्यनाथ ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह के चार साहिबजादों को जो सम्मान मिलना चाहिए था, वह नहीं मिला। वर्ष 2020 व 2021 में प्रदेश सरकार द्वारा मुख्यमंत्री आवास पर गुरु गोबिंद सिंह के चार साहिबज़ादों की शहादत को समर्पित कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने 26 दिसंबर की तिथि को वीर बाल दिवस के रूप में समर्पित करते हुए चारों साहिबजादों के स्मृति को जीवंत बना दिया। आने वाली पीढ़ी एवं नौजवानों को बताया गया कि जो देश एवं धर्म के लिए कुछ करेगा उसके प्रति समाज कृतज्ञता ज्ञापित करेगा। गुरु तेग बहादुर जी का शहीदी दिवस भी कृतज्ञता ज्ञापित करने का अवसर है।

भाषा

सलीम रवि कांत

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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