नयी दिल्ली, 21 नवंबर (भाषा) देश में परिवार अब अपने मासिक उपभोग व्यय का बड़ा हिस्सा गैर-खाद्य पदार्थों पर खर्च कर रहे हैं। इनमें उपभोग योग्य वस्तुएं, सेवाएं और टिकाऊ वस्तुएं शामिल हैं। इससे संकेत मिलता है कि घरों की आर्थिक स्थिति बेहतर हो रही है। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के एक कार्य-पत्र में यह कहा गया है।
ईएसी-पीएम ने शुक्रवार को जारी अपने कार्य-पत्र ‘भारत में टिकाऊ वस्तुओं के स्वामित्व में बदलाव: घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण 2011-12 एवं 2023-24 का विश्लेषण’ में कहा गया कि ग्रामीण तथा शहरी, दोनों क्षेत्रों में टिकाऊ वस्तुओं पर प्रति व्यक्ति मासिक व्यय (एमपीसीई) का हिस्सा बढ़ा है। कई राज्यों में ग्रामीण क्षेत्र का हिस्सा शहरी घरों से थोड़ा आगे निकल गया है।
साथ ही चालू कीमतों पर सभी राज्यों और सभी क्षेत्रों में खर्च बढ़ा है, लेकिन शहरी घरों में यह थोड़ा ज्यादा है।
कार्य-पत्र के मुताबिक, ”ऐसे में घरेलू उपभोग व्यय का बड़ा हिस्सा अब गैर-खाद्य मदों – उपभोग योग्य वस्तुएं, सेवाएं और टिकाऊ सामान – पर जा रहा है। शहरी क्षेत्रों में उपभोग योग्य वस्तुएं एवं सेवाएं ही घरेलू खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा हैं।”
इसमें कहा गया कि मोबाइल फोन हर जगह बढ़े हैं और इससे पूरे देश की आबादी के लिए आपस में बेहतर जुड़ाव और संचार सुविधा का पता चलता है।
रिपोर्ट के मुताबिक सस्ते और तेज नेटवर्क संपर्क के कारण मोबाइल अब सूचना, मनोरंजन और संचार का पसंदीदा माध्यम बनकर उभर रहा है। हालांकि, लैपटॉप और पर्सनल कम्प्यूटर कुछ ही घरों तक सीमित हैं।
इसमें कहा गया है कि अब कई राज्यों में टीवी स्वामित्व के घटने और मोबाइल की सार्वभौमिक पहुंच की स्थिति देखी जा रही है। इसको देखते हुए कहा गया है कि मोबाइल सूचना एवं मनोरंजन के माध्यम के रूप में टेलीविजन स्क्रीन की जगह ले रहा है।
परिवहन के साधनों एवं घरेलू उपकरणों जैसे टिकाऊ सामानों पर खर्च से घरों की आर्थिक स्थिति बेहतर होने का संकेत मिलता है।
भाषा पाण्डेय रमण
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