नयी दिल्ली, 20 नवंबर (भाषा) रिकॉर्ड तोड़ गर्मी से बिजली की मांग तेज हो रही है, जिससे जीवाश्म ईंधन पर देश की निर्भरता बढ़ रही है। बृहस्पतिवार को जारी एक अध्ययन में यह चेतावनी दी गई।
क्लाइमेट टेंड्स और क्लाइमेट कम्पैटिबल फ्यूचर्स द्वारा मिलकर जारी की गई रिपोर्ट ‘ब्रेकिंग द साइकल’ में यह भी कहा गया है कि भारत को ऊर्जा भंडारण और स्मार्ट ग्रिड अवसरंचना में तुरंत निवेश करना चाहिए।
इसके मुताबिक, पिछले एक दशक में 40 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तापमान वाले भीषण गर्मी के दिनों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। देश के 14 राज्यों में 2015 और 2024 के बीच गर्मी की तीव्रता में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
वर्ष 2024 में भारत का सालाना औसत तापमान 1991-2020 के औसत से 0.65 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था।
रिपोर्ट में कहा गया कि तापमान बढ़ने के साथ बिजली की मांग भी बढ़ी और भीषण गर्मी के दिनों में अप्रैल-जून, 2024 के दौरान भारत की अधिकतम बिजली मांग लगभग नौ प्रतिशत बढ़ी। इससे 32.7 करोड़ टन कार्बन डाई ऑक्साइड उत्सर्जन हुआ।
क्लाइमेट कम्पैटिबल फ्यूचर्स के सीईओ मनीष राम ने कहा, ‘‘बढ़ते तापमान ने लगातार बिजली की मांग बढ़ाई है। खासकर वातावरण को ठंडा करने की जरूरतों के लिए ऐसा हुआ, जिससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता बढ़ गई।’’
भाषा पाण्डेय अजय
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