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Thursday, 26 March, 2026
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वैश्विक चावल सम्मेलन के पहले दिन 25,000 करोड़ रुपये के अनुबंधों पर हस्ताक्षर: आईआरईएफ

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नयी दिल्ली, 30 अक्टूबर (भाषा) चावल निर्यातकों के निकाय आईआरईएफ ने कहा है कि बृहस्पतिवार से शुरू हुए वैश्विक चावल सम्मेलन के पहले दिन लगभग 25,000 करोड़ रुपये के अनुबंधों पर हस्ताक्षर होने का अनुमान है।

भारतीय चावल निर्यातक महासंघ (आईआरईएफ) 30-31 अक्टूबर को यहां भारत मंडपम में भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन (बीआईआरसी) 2025 का आयोजन कर रहा है।

आईआरईएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रेम गर्ग ने सम्मेलन से इतर पीटीआई वीडियो को बताया, ‘‘इस दो दिवसीय कार्यक्रम में 10,000 से अधिक लोग भाग ले रहे हैं। इसमें देश भर के 3,000 से अधिक किसान शामिल हैं।’’

उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में 80 से अधिक देशों के खरीदार भाग ले रहे हैं।

गर्ग ने कहा, ‘‘हमने एक ऐसा मंच बनाया है जहां भारतीय किसान और व्यापारी सीधे खरीदारों से लेन-देन कर रहे हैं।’’

व्यापारिक लेन-देन के संदर्भ में प्रतिक्रिया के बारे में पूछे जाने पर, उन्होंने कहा, ‘‘हमने सुना है कि सम्मेलन के पहले दिन ही खरीदारों के साथ 25,000 करोड़ रुपये के अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं।’’

आईआरईएफ अध्यक्ष ने बताया कि बीआईआरसी 2025 का उद्घाटन बृहस्पतिवार को विभिन्न राज्यों के किसानों द्वारा किया गया।

इस सम्मेलन में 80 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं, जिनमें शीर्ष वैश्विक चावल आयातक, निर्यातक, वैज्ञानिक और नीति-निर्माता शामिल हैं। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) इस आयोजन को गैर-वित्तीय सहायता प्रदान कर रहा है।

बीआईआरसी 2025 का एक विशेष आकर्षण कई राज्यों के 17 किसानों को अंतर्राष्ट्रीय खरीदारों द्वारा सम्मानित करना था, जिसमें चावल की खेती में गुणवत्ता, नवाचार और स्थिरता में उनके योगदान को मान्यता दी गई।

वर्ष 2024-25 में, भारत ने 12.95 अरब डॉलर मूल्य के 2.01 करोड़ टन चावल का निर्यात किया, जो 172 से अधिक देशों तक पहुंचा।

इस कार्यक्रम में देश की पहली कृत्रिम मेधा या एआई आधारित चावल छंटाई प्रणाली का भी शुभारंभ हुआ।

गर्ग ने कहा, ‘‘एआई और बिग डेटा द्वारा संचालित, यह नई प्रणाली चावल के दानों के रंग, आकार, आकृति और संरचना का एक साथ विश्लेषण कर सकती है, जिससे लागत, बिजली की खपत और जनशक्ति में कमी के साथ-साथ अभूतपूर्व सटीकता और दक्षता प्राप्त होती है। यह भारत के कृषि प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए एक बड़ी छलांग है।’’

एक विशेष महिला उद्यमी, स्टार्टअप और एमएसएमई मंडप, बीज विकास और कटाई के बाद की तकनीकों से लेकर पैकेजिंग, ब्रांडिंग, डिजिटल व्यापार और ब्लॉकचेन-आधारित ट्रेसेबिलिटी तक, कृषि-मूल्य श्रृंखला में नवाचार पर प्रकाश डालता है।

इस कार्यक्रम के माध्यम से, एसोसिएशन वैश्विक व्यापार में भारत की हिस्सेदारी का विस्तार करना चाहता है। चावल निर्यात बढ़ाने के लिए 26 देशों की पहचान संभावित बाजारों के रूप में की गई है। इन देशों में 1.8 लाख करोड़ रुपये की निर्यात क्षमता है।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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