नयी दिल्ली, 24 अक्टूबर (भाषा) भारत ने चालू वित्त वर्ष में अब तक 52,113 हेक्टेयर क्षेत्र में पामतेल की खेती की है, जिसमें सबसे अधिक विस्तार तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में हुआ है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
इस वृद्धि के साथ, अगस्त 2021 में शुरू होने के बाद से राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन- पामतेल (एनएमईओ-ओपी) योजना के तहत पामतेल खेती का कुल रकबा 2,41,000 हेक्टेयर हो गया है। अब देश भर में इसका कवरेज 6,00,000 हेक्टेयर है।
कृषि मंत्रालय के एक अधिकारी ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘तेल-पाम की खेती में तेजी आ रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में 22 अक्टूबर तक इसका रकबा 52,113 हेक्टेयर तक पहुंच गया है।’’
नए रकबे में आंध्र प्रदेश का हिस्सा 13,286 हेक्टेयर है, उसके बाद तेलंगाना का 12,005 हेक्टेयर है, जबकि शेष क्षेत्रफल छत्तीसगढ़, गोवा और गुजरात जैसे राज्यों का है।
अधिकारी ने बताया कि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के किसानों ने उच्च लाभ के लिए पाम तेल की खेती को अपनाया है और अक्सर इसे कोको एवं अन्य फसलों के साथ उगा रहे हैं।
भारत वर्तमान में अंकुरित पाम तेल के बीजों का आयात करता है और खेतों में रोपाई से पहले 18 महीने तक नर्सरी में उगाता है। सरकार ने इस प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए इस साल बीज उद्यानों को मंजूरी दी है।
एनएमईओ-ओपी के तहत 638.5 टन प्रति घंटे की क्षमता वाली 24 मिलों को मंजूरी दी गई है।
मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2025-26 में दो लाख हेक्टेयर क्षेत्र में पाम तेल की खेती करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, असम, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा और मिजोरम इस खेती में अग्रणी राज्य हैं।
भारत ने पाम तेल के लिए 28 लाख हेक्टेयर उपयुक्त भूमि की पहचान की है, जो सोयाबीन, सूरजमुखी, रेपसीड-सरसों और मूंगफली जैसे तिलहनों की तुलना में प्रति हेक्टेयर 10 गुना अधिक तेल पैदा करता है।
भारत अपनी खाद्य तेल जरूरतों का 57 प्रतिशत आयात करता है, जिसमें पाम ऑयल का हिस्सा सबसे बड़ा है।
भाषा राजेश राजेश प्रेम
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