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Sunday, 11 January, 2026
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ट्रेन सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ का अभी वैश्विक मानकों पर खरा उतरना बाकी: हिताची रेल इंडिया

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(जीवन प्रकाश शर्मा द्वारा)

नयी दिल्ली, 23 अक्टूबर (भाषा) रेलवे समाधान प्रदान करने वाली कंपनी हिताची रेल इंडिया के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा है कि भारत की स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ का वैश्विक मानकों पर खरा उतरना अभी बाकी है।

‘कवच’ स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (एटीपी) प्रणाली है। रेल मंत्रालय का कहना है कि यह अत्यधिक प्रौद्योगिकी-प्रधान प्रणाली है और उच्चतम सुरक्षा प्रमाणन के साथ आती है।

ट्रेन के चालक द्वारा ब्रेक न लगा पाने की स्थिति में ‘कवच’ स्वचालित रूप से ब्रेक लगाकर उसे निर्दिष्ट गति सीमा के भीतर ट्रेनों को चलाने में सहायता करता है। यह खराब मौसम के दौरान ट्रेन सुरक्षा को भी बढ़ाता है।

भारतीय रेलवे नेटवर्क पर कवच प्रणाली को बड़े पैमाने पर तैनात किए जाने की प्रक्रिया में जापानी कंपनी हिताची के भागीदार न होने के बारे में पूछे जाने पर हिताची रेल एसटीएस इंडिया के पूर्णकालिक निदेशक और कंपनी प्रतिनिधि मनोज कुमार कृष्णप्पा ने कहा कि कवच अभी वैश्विक मानकों के अनुरूप नहीं है।

कृष्णप्पा ने पीटीआई-भाषा से बातचीत में कहा, ‘‘हम कवच समाधानों का हिस्सा नहीं बने क्योंकि यह भारतीय रेलवे के लिए एक स्वदेशी जरूरत है। मुझे बहुत खुशी है कि कई भारतीय कंपनियां कवच पर काम कर रही हैं। हिताची इंडिया को इस बात पर गर्व है कि यह एक भारतीय उत्पाद है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह अभी वैश्विक मानकों की जरूरतों के अनुरूप एक स्थापित प्रौद्योगिकी नहीं है। इसलिए हम प्रतीक्षा कर रहे हैं और इ्स पर नजर रखे हुए हैं।’’

रेल मंत्रालय ने वर्ष 2018-19 में कवच प्रणाली की शुरुआत की थी। हालांकि देश भर के कई रेल खंडों पर यह प्रणाली पहले ही लगाई जा चुकी है, लेकिन इसे अभी चालू किया जाना बाकी है।

रेल मंत्रालय का दावा है कि कवच प्रणाली यूरोपीय ट्रेन नियंत्रण प्रणाली (ईटीसीएस) के स्तर-2 के बराबर है।

कवच के आगमन से पहले हिताची रेल एसटीएस इंडिया ने वर्ष 2016 में भारत की पहली उच्च गति वाली ट्रेन गतिमान एक्सप्रेस में ट्रेन सुरक्षा एवं चेतावनी प्रणाली (टीपीडब्ल्यूएस) को लागू किया था।

कृष्णप्पा ने कवच प्रणाली के टीपीडब्ल्यूएस से बेहतर होने के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘‘टीपीडब्ल्यूएस कहीं एक बेहतर प्रौद्योगिकी है।… भारत ने मुख्य रूप से लागत और अन्य कारणों से टीपीडब्ल्यूएस को नहीं अपनाया।’’

इसके साथ ही उन्होंने कहा, ‘‘मेरा मानना ​​है कि भारत को किसी-न-किसी मोड़ पर आत्मनिर्भर बनना ही होगा। हमें वर्ष 2047 के लिए प्रधानमंत्री के सपने को साकार करना होगा। हमारे अपने उत्पाद और अपनी भारतीय कंपनियां होनी चाहिए।’’

कृष्णप्पा ने कहा कि पिछले 27 वर्षों से भारत में मौजूद हिताची रेल एसटीएस ने भारतीय रेलवे नेटवर्क पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग, ऑटो ब्लॉक सिग्नलिंग और केंद्रीकृत यातायात नियंत्रण (सीटीसी) सहित कई उन्नत तकनीकों को पेश किया है।

भाषा राजेश राजेश प्रेम

प्रेम

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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