नयी दिल्ली, 23 अक्टूबर (भाषा) सोयाबीन प्रसंस्करणकर्ता संघ (सोपा) ने बृहस्पतिवार को वाणिज्य मंत्रालय से अमेरिका से ‘आनुवंशिक रूप से संवर्धित’ (जीएम) सोयाबीन डी-आयल्ड केक (डीओसी) के आयात की अनुमति देने के किसी भी प्रस्ताव को अस्वीकार करने का आग्रह किया।
संघ ने कहा कि देश में सोयाबीन डीओसी की पर्याप्त घरेलू आपूर्ति है और जीएम उत्पादों के आयात की अनुमति देने से किसानों को नुकसान होगा।
उद्योग निकाय ने वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल को लिखे एक पत्र में कहा कि भारत के पास वर्तमान में अक्टूबर से सितंबर तक चलने वाले विपणन सत्र 2025-26 की संपूर्ण घरेलू मांग को पूरा करने के लिए सोयाबीन डीओसी का पर्याप्त से भी अधिक भंडार मौजूद है।
सोपा ने कहा, ‘‘इस समय जीएम सोयाबीन डीओसी के आयात की अनुमति देने से भारत के कृषि क्षेत्र पर विनाशकारी परिणाम होंगे।’’
संगठन ने चेतावनी दी है कि पहले से ही सरकार के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम कीमतों से जूझ रहे भारतीय सोयाबीन किसानों को इस अनुमति से गंभीर नुकसान होगा और अधिक आपूर्ति के कारण बाजार दरों में और गिरावट आएगी।
इसने कहा कि इस कदम से भारत के घरेलू सोयाबीन प्रसंस्करण उद्योग की लाभप्रदता को खतरा होगा और सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ नीति को भी नुकसान होगा।
उद्योग निकाय ने कहा कि भारत ने उच्च गुणवत्ता वाले गैर-जीएम सोयाबीन उत्पादों के आपूर्तिकर्ता के रूप में एक अच्छी प्रतिष्ठा बनाई है, जो उन बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्रदान करता है जहां खरीदार विशेष रूप से मूल-स्थान की जांच करने योग्य, गैर-जीएमओ मूल की मांग करते हैं।
सोयाबीन प्रसंस्करणकर्ताओं ने सरकार से जीएम सोयाबीन डीओसी को किसी भी द्विपक्षीय व्यापार समझौते या आयात अनुमति से बाहर रखने और भारत की गैर-जीएमओ सोयाबीन खेती और प्रसंस्करण पारिस्थितिकी की रक्षा करने का अनुरोध किया।
भाषा राजेश राजेश प्रेम
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