नयी दिल्ली, 19 अक्टूबर (भाषा) राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने दूरसंचार उपकरण बनाने वाली कंपनी जेडटीई की भारतीय इकाई के खिलाफ टीवीएस सप्लाई चेन सॉल्यूशंस द्वारा दायर दिवाला याचिका को खारिज कर दिया है। यह याचिका दोनों पक्षों के बीच पहले से मौजूद विवाद को देखते हुए दायर की गई थी।
एनसीएलटी की चंडीगढ़ स्थित पीठ के अनुसार, टीवीएस सप्लाई चेन सॉल्यूशंस द्वारा दावा किया गया ऋण विवादित था और वैधानिक मांग नोटिस जारी होने से काफी पहले, 2017 से ही सुलह के अधीन था।
एनसीएलटी के सदस्यों कौशलेंद्र कुमार सिंह और खेत्रवासी बिस्वाल की पीठ ने कहा, इन तथ्यों के मद्देनजर, हमारा मानना है कि चूंकि यह पहले से मौजूद विवाद का मामला है, इसलिए धारा 9 के तहत आवेदन बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है।’’
टीवीएस सप्लाई चेन सॉल्यूशंस, जिसे पहले टीवीएस लॉजिस्टिक्स सर्विसेज के नाम से जाना जाता था, ने दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता संहिता की धारा 9 के तहत याचिका दायर करके जेडटीई टेलीकॉम इंडिया पर 4.27 करोड़ रुपये की चूक का दावा करते हुए दिवाला न्यायाधिकरण का रुख किया था। यह विवाद जून, 2012 से फरवरी, 2019 तक की अवधि का है।
रिलायंस, टाटा, एयरसेल और बीएसएनएल जैसी कंपनियों के लिए दूरसंचार उपकरण आपूर्तिकर्ता जेडटीई ने टीवीएस सप्लाई चेन के साथ दो मास्टर सर्विस करार (एमएसए) किए थे।
एमएसए के अनुसार, टीवीएस सप्लाई चेन सॉल्यूशंस नियमित अंतराल पर इनवॉइस जारी करती था, जिनका भुगतान बिल जारी होने के 30 दिन के भीतर किया जाना था।
हालांकि, टीवीएस सप्लाई चेन सॉल्यूशंस ने आरोप लगाया कि जेडटीई ने आमतौर पर या तो जारी किए गए बिलों का आंशिक भुगतान किया है या फिर इनवॉइस के संतोषजनक न होने का बहाना बनाकर भुगतान में देरी की है, और 2012 से कुछ राशि हमेशा बकाया और देय रही हैं।
सितंबर, 2015 तक, जेडटीई द्वारा विभिन्न परियोजनाओं के लिए 7.04 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया था।
हालांकि, जेडटीई ने बिलों पर एक ऑडिट पूछताछ भेजी थी और पहले के बिलों में विसंगतियों का दावा किया था। बाद में, दोनों पक्षों के बीच कुछ ईमेल का आदान-प्रदान हुआ।
अंततः, 29 जनवरी, 2018 को, जेडटीई ने टीवीएस को एक पत्र लिखा जिसमें उसने कहा कि टीवीएस के चालान में 5.60 करोड़ रुपये की कथित विसंगतियां हैं। हालांकि, जेडटीई ने कोई भी सहायक दस्तावेज साझा नहीं किए।
इसके बाद नौ जुलाई, 2018 को, टीवीएस ने आईबीसी की धारा 8 के तहत एक मांग नोटिस जारी किया, जिसमें 4.27 करोड़ रुपये मूलधन और 12 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज के रूप में भुगतान की मांग की गई। अपने जवाब में, जेडटीई ने टीवीएस को अतिरिक्त राशि का भुगतान किए जाने का आरोप लगाते हुए पहले से मौजूद विवाद का हवाला दिया।
बाद में, सात मई, 2019 को, टीवीएस ने जेडटीई के खिलाफ दिवाला याचिका दायर करके एनसीएलटी का रुख किया।
भाषा अजय अजय
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