(माइकल जे. आई. ब्राउन, मोनाश विश्वविद्यालय, और मैथ्यू केनवर्थी, लीडेन विश्वविद्यालय)
मेलबर्न, 11 अक्टूबर (द कन्वरसेशन) अमेरिका का एक स्टार्टअप उपग्रहों के एक प्रस्तावित समूह के जरिये ‘‘मांग आधारित सूर्य का प्रकाश’’ उत्पन्न करने की योजना पर काम कर रहा है, जिसके लिए दर्पणों का उपयोग किया जाएगा जो सूर्य की रोशनी को पृथ्वी पर भेजेंगे।
इसकी शुरुआत 18 मीटर के परीक्षण उपग्रह, इयरेंडिल-1 से करने की योजना है, जिसे 2026 में प्रक्षेपित करने के लिए कंपनी ने आवेदन किया है। नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार, इसके बाद 2030 तक लगभग 4,000 उपग्रह कक्षा में स्थापित किए जाएंगे।
क्या ‘रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल’ के उपग्रह विज्ञापन के अनुसार काम भी कर सकते हैं?
सूर्य के प्रकाश का परावर्तन
जिस तरह आप सूर्य की रोशनी को परावर्तित करके प्रकाश का एक बिंदु बनाते हैं, उसी तरह रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल के उपग्रह पृथ्वी के एक हिस्से पर प्रकाश की किरण करने के लिए दर्पणों का उपयोग करेंगे।
लेकिन इसमें शामिल पैमाना बहुत अलग है। रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल के उपग्रह जमीन से लगभग 625 किमी ऊपर परिक्रमा करेंगे, और अंततः उनके दर्पण 54 मीटर चौड़े होंगे।
जब आप अपनी घड़ी से प्रकाश को पास की दीवार पर परावर्तित करते हैं, तो प्रकाश का बिंदु बहुत चमकीला हो सकता है। लेकिन अगर आप इसे दूर की दीवार पर परावर्तित करते हैं, तो वह बिंदु बड़ा और धुंधला हो जाता है।
ऐसा इसलिए है कि सूर्य के प्रकाश का एक बिंदु नहीं है, बल्कि आकाश में आधा डिग्री के कोण पर फैला हुआ है। इसका मतलब है कि लंबी दूरी पर, एक सपाट दर्पण से परावर्तित सूर्य की किरण आधे डिग्री के कोण पर फैलती है।
व्यवहार में इसका क्या अर्थ है? आइए लगभग 800 किलोमीटर की दूरी से सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करने वाले एक उपग्रह का उदाहरण लें – क्योंकि 625 किमी की ऊंचाई पर स्थित उपग्रह हमेशा सीधे ऊपर नहीं होगा, बल्कि एक कोण पर सूर्य के प्रकाश को किरणित करेगा। रोशन जमीन का वह भाग कम से कम सात किमी चौड़ा होगा।
यहां तक कि एक घुमावदार दर्पण या लेंस भी सूर्य के प्रकाश को आकाश में सूर्य की दूरी और आधे डिग्री के कोण के कारण किसी संकरी जगह पर केंद्रित नहीं कर सकता।
क्या यह परावर्तित सूर्य का प्रकाश चमकीला होगा या मद्ध्रिम? 54 मीटर लंबे उपग्रह के लिए, यह दोपहर के सूर्य से 15,000 गुना कम चमकीला होगा, लेकिन फिर भी यह पूर्णिमा के चांद से कहीं अधिक चमकीला होगा।
गुब्बारा परीक्षण
पिछले साल, रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल के संस्थापक बेन नोवाक ने एक वीडियो पोस्ट किया था जिसमें अंतरिक्ष में जाने से पहले बनाई जाने वाली आखिरी चीज के साथ एक परीक्षण का सारांश दिया गया था। यह एक गर्म हवा के गुब्बारे पर रखा गया एक परावर्तक था।
हालांकि, गुब्बारा परीक्षण की कुछ सीमाएं हैं।
तो रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल क्या करने की योजना बना रहा है?
रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल की योजना ‘‘मौजूदा सौर फार्मों पर सही समूह में स्थित साधारण उपग्रहों की चमक’’ है। और उनका लक्ष्य केवल 200 वाट प्रति वर्ग मीटर – दोपहर के सूर्य के प्रकाश का 20 प्रतिशत – है।
क्या छोटे उपग्रह यह क्षमता प्रदान कर सकते हैं? यदि 54 मीटर का एक उपग्रह दोपहर के सूर्य से 15,000 गुना कम चमकीला है, तो दोपहर के सूर्य का 20 प्रतिशत प्रकाश प्राप्त करने के लिए आपको 3,000 उपग्रहों की आवश्यकता होगी। एक क्षेत्र को प्रकाशित करने के लिए इतने सारे उपग्रह पर्याप्त हैं।
एक और समस्या : 625 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित उपग्रह 7.5 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से चलते हैं। इसलिए एक उपग्रह किसी दिये गए स्थान से 1,000 किलोमीटर के दायरे में अधिकतम 3.5 मिनट तक ही रहेगा।
इसका मतलब है कि 3,000 उपग्रह आपको कुछ मिनटों की रोशनी दे पाएंगे। एक घंटे की रोशनी देने के लिए भी, आपको हज़ारों उपग्रहों की आवश्यकता होगी।
रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल में महत्वाकांक्षा की कमी नहीं है। एक साक्षात्कार में, नोवाक ने 600 किलोमीटर ऊंची कक्षाओं में 2,50,000 उपग्रहों का सुझाव दिया था। यह वर्तमान में सूचीबद्ध सभी उपग्रहों और अंतरिक्ष कचरे के बड़े टुकड़ों को मिलाकर भी उससे अधिक है।
और फिर भी, हमारी उपरोक्त गणना के आधार पर, वह विशाल तारामंडल दोपहर के सूर्य का केवल 20 प्रतिशत ही एक साथ 80 से अधिक स्थानों पर पहुंचा पाएगा। व्यवहार में, बादलों वाले मौसम के कारण और भी कम स्थान प्रकाशित होंगे।
इसके अतिरिक्त, अपनी ऊंचाई को देखते हुए, उपग्रह ज़्यादातर स्थानों पर केवल शाम और सुबह के समय ही प्रकाश पहुंचा पाएंगे, जब पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थित दर्पण पर सूर्य का भरपूर प्रकाश होगा। इस बात को ध्यान में रखते हुए, रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल ने अपने तारामंडल को सूर्य-समकालिक कक्षाओं में दिन-रात की रेखा के ऊपर पृथ्वी की परिक्रमा करने की योजना बनाई है ताकि वे लगातार सूर्य के प्रकाश में रहें।
चमकदार रोशनी
तो, क्या दर्पण उपग्रह रात में किफायती सौर ऊर्जा उत्पादन का एक व्यावहारिक साधन हैं? शायद नहीं।
रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल की योजना के अनुसार, अगर केवल परीक्षण उपग्रह भी योजना के अनुसार काम करता है, तो भी यह कभी-कभी पूर्णिमा के चंद्रमा से कहीं अधिक चमकीला दिखाई देगा। ऐसे दर्पणों का एक समूह खगोल विज्ञान के लिए विनाशकारी और खगोलविदों के लिए ख़तरनाक होगा। दूरबीन से देखने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए प्रत्येक दर्पण की सतह लगभग सूर्य की सतह जितनी चमकीली हो सकती है, जिससे आंखों को स्थायी नुकसान होने का खतरा है।
रात के समय उत्पन्न किया गया प्रकाश ब्रह्मांड को देखने की सभी की क्षमता में बाधा डालेगा और यह जानवरों के जीवन को प्रभावित करेगा।
रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल का उद्देश्य विशिष्ट स्थानों को रोशन करना है, लेकिन उपग्रहों की किरणें एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते समय पृथ्वी पर भी फैलेंगी। रात का आकाश चंद्रमा से भी अधिक चमकीली रोशनी की चमक से जगमगा सकता है।
कंपनी ने समय सीमा के भीतर इन चिंताओं के बारे में कोई जवाब नहीं दिया। हालांकि, उसने इस हफ्ते ब्लूमबर्ग को बताया कि उसकी योजना सूर्य के प्रकाश को ‘‘संक्षिप्त, पूर्वानुमानित और लक्षित’’ तरीकों से पुनर्निर्देशित करने की है ताकि वैज्ञानिक अपने काम की योजना बना सकें।
इसके परिणाम भयावह होंगे
यह देखना बाकी है कि रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल की परियोजना क्रियान्वित हो पाती है या नहीं। कंपनी एक परीक्षण उपग्रह लॉन्च कर सकती है, लेकिन कुछ सौर फार्मों को दिन में कुछ अतिरिक्त घंटों तक चालू रखने के लिए 2,50,000 विशाल दर्पणों को लगातार पृथ्वी की परिक्रमा कराने में अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है।
फिर भी, यह एक ऐसी परियोजना है जिस पर नजर रखनी होगी। खगोलविदों के लिए – और उन सभी के लिए जो रात के आसमान में अंधेरा पसंद करते हैं – इसकी सफलता के परिणाम भयावह होंगे।
(द कन्वरसेशन) सुभाष संतोष
संतोष
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