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Wednesday, 11 March, 2026
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पाकिस्तान सेना ने आतंकवादियों और उनके मददगारों को चेतावनी दी, बातचीत से इनकार किया

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पेशावर, 10 अक्टूबर (भाषा) पाकिस्तानी सेना ने शुक्रवार को आतंकवादियों और उनके मददगारों को कड़ी चेतावनी दी और देश में आतंकवाद के मुद्दे को हल करने के लिए उनके साथ बातचीत करने के विचार को खारिज कर दिया।

सेना प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने यहां मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि दुर्भाग्यवश, खैबर पख्तूनख्वा में आतंकवादियों को पनाह दी गई जिससे जनता और कानून लागू करने वाली एजेंसियों को नुकसान पहुंचा है।

उन्होंने कहा कि 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता पर काबिज होने के बाद से खैबर पख्तूनख्वा में आतंकवाद में वृद्धि हुई है। चौधरी ने कहा कि आतंकवाद को खत्म करने के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना (एनएपी) का पालन नहीं किए जाने के कारण देश में हाल में आतंकवादी घटनाएं बढ़ी हैं।

पेशावर में सेना के एक स्कूल पर हुए आतंकवादी हमले के बाद 2014 में तैयार एनएपी दस्तावेज़ में आतंकवाद-उग्रवाद को खत्म करने के लिए 20 बिंदु तय किए गए थे। 2021 में इसे उग्रवाद से निपटने के लिए 14 बिंदुओं के साथ अद्यतन किया गया।

जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा, ‘शासन और जन कल्याण को जानबूझकर कमज़ोर किया गया और एक भ्रामक विमर्श को आगे बढ़ाने की कोशिश की गई। ख़ैबर पख़्तूनख्वा के लोग आज भी अपने खून और बलिदान से इसकी कीमत चुका रहे हैं।’

ख़ैबर पख़्तूनख्वा में इमरान खान की पार्टी की सरकार है।

तथ्य और आंकड़े पेश करते हुए चौधरी ने कहा कि 2024 में 14,535 अभियान चलाए गए, जिनमें 769 आतंकवादी और 577 सुरक्षाकर्मी और नागरिक मारे गए। उन्होंने कहा कि इस साल 15 सितंबर तक 10,115 और अभियान चलाए गए, जिनमें 917 आतंकवादी और 516 सुरक्षाकर्मी और नागरिक मारे गए।

उन्होंने अफगानिस्तान पर पनाहगाह को खत्म करने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए कहा कि पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए उन्हें मनाने को लेकर कई स्तर पर बातचीत कर रहा है। चौधरी ने अफगानिस्तान में उग्रवाद को कथित रूप से संरक्षण देने के लिए भारत को भी दोषी ठहराया।

ख़ैबर पख़्तूनख्वा सरकार की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि प्रांतीय सरकार अपने आतंकवाद-रोधी विभाग को विकसित करने में विफल रही है, जिसमें केवल 3,200 कर्मचारी हैं।

भाषा आशीष अविनाश

अविनाश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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