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Wednesday, 1 April, 2026
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दुनियाभर में, प्रवासियों को खतरनाक रूप से निर्वासित किया जा रहा है- यह सामान्य कैसे हो गया?

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(एंडोनिया जॉन डिक्सन, सेट्टा मेनवारिंग और थॉम टायरमैन, एडिनबर्ग विश्वविद्यालय द्वारा)

एडिनबर्ग, पांच अक्टूबर (द कन्वरसेशन) राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में, अमेरिका गैर-नागरिकों को हिरासत में लेने और निर्वासित करने के अपने प्रयासों का खतरनाक दर से विस्तार कर रहा है।

हाल के महीनों में, ट्रंप प्रशासन ने निर्वासित गैर-नागरिकों को भेजने के लिए कई ‘तीसरे देशों’ के साथ समझौते किए हैं।

गैर नागरिकों का ‘तीसरे देशों’ में निर्वासन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें उन्हें उनके मूल देश या वहां के अलावा किसी अन्य देश में भेजा जाता है, जहां उनका कोई पूर्व संबंध या आधार नहीं होता। यह तब होता है जब उनका मूल देश उन्हें स्वीकार करने से इनकार करता है, या निर्वासन व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होता है।

ऑस्ट्रेलिया में, लेबर सरकार ने इसी तरह गैर-नागरिकों को तीसरे देशों में निर्वासित करने के लिए नयी शक्तियां स्थापित की हैं। सरकार ने सितंबर में नाउरू के साथ एक गुप्त समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत निर्वासितों के पहले समूह को समायोजित करने के लिए छोटे माइक्रोनेशियाई द्वीप को अगले तीन दशकों में 2.5 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की गारंटी दी गई।

दोनों देशों में अब प्रवासियों को उन देशों में भेजा जा सकता है, जिनसे उनका कोई पूर्व संबंध नहीं है।

पिछले साल ब्रिटेन में, प्रधानमंत्री केअर स्टार्मर की लेबर पार्टी ने वादा किया था कि पिछली कंजर्वेटिव सरकार की लोगों को रवांडा निर्वासित करने की योजना ‘‘मृत और दफन हो चुकी है’’। हालांकि लेबर पार्टी ने 2024 में लगभग 35 हजार लोगों को हटा दिया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 25 प्रतिशत की वृद्धि है।

इस बीच, अति-दक्षिणपंथी ‘रिफॉर्म पार्टी’ ने एक ‘‘सामूहिक निर्वासन’’ योजना पेश की है, जिसके तहत अगले आम चुनाव में सत्ता हासिल करने पर हजारों लोगों को हिरासत में लेने और निर्वासित करने के लिए सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल किया जायेगा।

यूरोप में भी जल्द ही ऐसी ही नीतियां लागू हो सकती हैं। मई में, यूरोपीय आयोग ने एक प्रस्ताव पेश किया था जिसके तहत यूरोपीय संघ के सदस्य देश शरण चाहने वाले लोगों को ऐसे तीसरे देशों में निर्वासित कर सकेंगे जहां उनका कोई पूर्व संबंध नहीं है।

समस्याग्रस्त समझी जाने वाली आबादी का निर्वासन कोई नयी प्रथा नहीं है। सदियों से, देश लोगों को जबरन निर्वासित करने के लिए निर्वासन के विभिन्न तरीकों का इस्तेमाल करते रहे हैं, जैसा कि ब्रिटिश दंडात्मक उपनिवेश के रूप में ऑस्ट्रेलिया का अपना इतिहास दर्शाता है।

आज, दुनियाभर में प्रवासन प्रशासन का एक अभिन्न अंग निर्वासन है। हालांकि, हिरासत और निर्वासन का हालिया विस्तार गैर-नागरिकों के बढ़ते अपराधीकरण और दंड को दर्शाता है जो कथित रूप से उदार पश्चिमी देशों में बढ़ते अधिनायकवाद से जुड़ा है।

सरकारों ने एक साथ ही शरण मांगने के कृत्य को मानव अधिकार से आपराधिक कृत्य में बदल दिया है, तथा तटवर्ती और अपतटीय आव्रजन हिरासत को उचित ठहराने के लिए, पलायन करने वालों को ‘‘अवैध’’ करार दिया है।

अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया में, यह अपराधीकरण वाली भाषा, जो कभी दक्षिणपंथी प्रेस का विशेषाधिकार थी, अब सभी राजनीतिक दलों के नेताओं द्वारा अपनाई जा रही है और इसे कानून में शामिल किया गया है।

उदाहरण के लिए, ऑस्ट्रेलिया में सरकार ने 2014 में वीजा रद्द करने की सीमा कम कर दी, जिसके परिणामस्वरूप मामूली अपराध करने वाले लोगों को हिरासत में लिया गया और उन्हें निर्वासित करने की योजना बनाई गई।

जो लोग अपने देश वापस नहीं लौट सके, वे तब तक हिरासत में ही रहे जब तक कि 2023 में उच्च न्यायालय के फैसले ने उनकी रिहाई का आदेश नहीं दे दिया।

अपनी सजा पूरी करने तथा आव्रजन हिरासत में लंबे समय तक रहने के बावजूद, मीडिया में इन लोगों को समुदाय के लिए एक बड़े खतरे के रूप में पेश किया गया।

इसके बाद लेबर सरकार ने हजारों अन्य लोगों के साथ-साथ उन्हें भी अनिश्चित वीजा पर तीसरे देश में निर्वासित करने का कानून बनाया।

निर्वासन भी कई वर्षों से अमेरिकी आव्रजन प्रवर्तन का एक केंद्रीय पहलू रहा है।

पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा को पद पर रहते हुए रिकॉर्ड 30 लाख निर्वासन करने के लिए ‘‘डिपोर्टर इन चीफ’’ की संज्ञा दी गई थी।

हिरासत और निर्वासन का इस्तेमाल गाजा में नरसंहार जैसे मुद्दों पर राजनीतिक असहमति को दबाने के लिए भी किया गया है।

अपने पहले वर्ष में दस लाख लोगों को निर्वासित करने के अपने वादे को शीघ्र पूरा करने के लिए, ट्रंप प्रशासन ने जल्दबाजी में पूर्व जेलों और सैन्य ठिकानों में हिरासत केंद्र स्थापित कर दिए, जिनमें ग्वांतानामो बे भी शामिल है।

जून में, आठ लोगों को उनके निष्कासन का विरोध करने का अवसर दिए बिना अमेरिका से दक्षिण सूडान निर्वासित कर दिया गया था।

समुदाय अब संगठित हो रहे हैं और एक अलग तरह की राजनीति की मांग कर रहे हैं।

(द कन्वरसेशन)

देवेंद्र नरेश

नरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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