नयी दिल्ली, तीन अक्टूबर (भाषा) नीति आयोग ने शुक्रवार को विदेशी कंपनियों के लिए अनुमानित कराधान योजना लागू करने का सुझाव दिया ताकि निवेशकों को सरलता और निश्चितता मिल सके।
आयोग ने एक शोध रिपोर्ट में कहा कि यह वैकल्पिक योजना ‘स्थायी प्रतिष्ठान’ (पीई) से जुड़े विवादों को सुलझाने, अनुपालन को आसान बनाने और राजस्व संरक्षण में मदद करेगी।
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित अनुमानित कराधान योजना एक दीर्घकालिक समस्या का एक सक्रिय और व्यावहारिक समाधान है।
रिपोर्ट कहती है, ‘यह भारत के कर लगाने के संप्रभु अधिकार और विदेशी निवेशकों को निश्चितता एवं सहजता प्रदान करने की जरूरत के बीच संतुलन स्थापित करती है।’
इसके मुताबिक, भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) बढ़ने के बावजूद पीई से जुड़े अस्पष्ट नियम निवेशकों के बीच कर असुरक्षा पैदा करते हैं।
यह कराधान योजना कुछ परिस्थितियों में करदाताओं को नियमित बही-खाता रखने के थकाऊ काम से राहत मुहैया कराती है।
इस योजना को चुनने वाली कंपनी एक निर्धारित दर पर आय घोषित कर सकती है। इसके बदले में, उसे कर अधिकारियों द्वारा लेखा-परीक्षा के लिए बही-खाता रखने के दायित्व से राहत मिल जाती है।
इस पत्र में इस पर जोर दिया गया है कि यह साहसिक सुधार कर नीति का व्यापक आर्थिक दृष्टिकोण के साथ सामंजस्य बनाने का काम करेगा।
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि विभिन्न क्षेत्रों के लिए अलग-अलग अनुमानित लाभ दरें तय की जाएं और विदेशी कंपनियों को योजना से बाहर जाकर साधारण रिटर्न फाइल करने की भी छूट मिले।
इसके अलावा, कर अधिकारियों को डिजिटल और अंतरराष्ट्रीय मामलों में नियमों का संगत और पारदर्शी अनुपालन करने के लिए प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।
भाषा प्रेम प्रेम रमण
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