इस्लामाबाद, तीन अक्टूबर (भाषा) पाकिस्तान के पत्रकारों ने राष्ट्रीय राजधानी स्थित एक प्रेस क्लब में पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई और पत्रकारों के साथ मारपीट के लिए संघीय सरकार की आलोचना की है, वहीं गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने इस घटना की जांच के आदेश दिए हैं।
इस्लामाबाद पुलिस ने बृहस्पतिवार को जम्मू-कश्मीर संयुक्त आवामी एक्शन कमेटी के विरोध प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करते हुए नेशनल प्रेस क्लब पर हमला किया। टीवी फुटेज में पुलिसकर्मियों को प्रेस क्लब परिसर में पत्रकारों पर लाठियां बरसाते हुए देखा जा सकता है।
समाचार पत्र ‘डॉन’ की एक खबर के अनुसार नकवी ने कहा है कि उन्होंने इस ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ घटना का संज्ञान लिया है और इस्लामाबाद के पुलिस महानिरीक्षक से इस संबंध में एक रिपोर्ट मांगी है।
उनके हवाले से कहा गया है, ‘‘पत्रकार समुदाय के खिलाफ हिंसा किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जा सकती।’’
‘डॉन’ की खबर के अनुसार, पाकिस्तान फेडरल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स के अध्यक्ष अफजल बट ने नेशनल प्रेस क्लब में गृह राज्य मंत्री तलाल चौधरी के साथ संवाददाता सम्मेलन किया।
बट ने कहा कि पुलिस की छापेमारी के दौरान, जब प्रेस क्लब के पदाधिकारियों ने हस्तक्षेप कर मामला सुलझाने का प्रयास किया तो उन्हें पीटा गया।
बट ने कहा, ‘उन्होंने दो लोगों को गिरफ़्तार भी किया, जिन्हें बाद में रिहा कर दिया गया।’’
चौधरी ने कहा कि वह घटना इस की निंदा करते हैं और इसके लिए माफी मांगते हैं।
चौधरी के कार्यालय ने भी एक बयान जारी कर इस घटना के लिए बिना शर्त माफी मांगी और कहा कि यह ‘‘अचानक’’ हुआ।
पत्रकार संगठनों ने बाद में एक और संवाददाता सम्मेलन किया। पत्रकारों ने आरोप लगाया कि इस्लामाबाद के पुलिसकर्मी अपनी मर्ज़ी से प्रेस क्लब नहीं आए थे, बल्कि उन्हें यहाँ भेजा गया था।
भाषा अविनाश नरेश
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