नयी दिल्ली, तीन अक्टूबर (भाषा) सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) ने शुक्रवार को कहा कि तेल रहित चावल की भूसी पर प्रतिबंध हटाने से चावल मिलों और ‘सॉल्वेंट एक्सट्रैक्शन’ उद्योग को लाभ होगा। इससे खासकर देश के पूर्वी क्षेत्र को फायदा होगा क्योंकि इससे निर्यात के अवसर खुलेंगे।
सरकार ने मवेशियों के चारे के तौर पर इस्तेमाल होने वाली तेल रहित चावल भूसी (डीओआरबी) पर निर्यात प्रतिबंध हटाने की शुक्रवार को घोषणा की।
खाद्य तेल उद्योग निकाय एसईए ने सरकार से घरेलू प्रसंस्करणकर्ताओं की सुरक्षा और किसानों की आय बढ़ाने के लिए निर्यात पर प्रतिबंध हटाने का आग्रह किया था।
एसईए ने प्रतिबंध हटाने के सरकार के फैसले का स्वागत किया और कहा कि इससे किसानों और प्रसंस्करणकर्ताओं को चावल की भूसी के उप-उत्पादों की बेहतर कीमत प्राप्त करने में मदद मिलेगी। इससे चावल की भूसी के प्रसंस्करण को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे चावल की भूसी के तेल का उत्पादन बढ़ेगा जो आयात का विकल्प है।
भारत को अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित किया गया।
एसईए के कार्यकारी निदेशक बी. वी. मेहता ने बयान में कहा, ‘‘ एक बार फिर, इससे भारत के कृषि प्रसंस्करण निर्यात को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी और वैश्विक चारा बाजारों के लिए एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में देश की पहचान मजबूत होगी।’’
भारत प्रतिबंध से पहले पांच-छह लाख टन तेल-रहित चावल की भूसी का निर्यात करता था, जिसका मूल्य प्रति वर्ष 1,000 करोड़ रुपये था। यह निर्यात मुख्य रूप से वियतनाम, थाईलैंड और अन्य एशियाई देशों को किया जाता था।
यह प्रतिबंध पिछले वर्ष लगाया गया था।
मेहता ने कहा, ‘‘ हम पूरी कोशिश करेंगे और अपने 1,000 करोड़ रुपये के वार्षिक कारोबार पर वापस लौटेंगे।’’
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