नयी दिल्ली, 30 सितंबर (भाषा) दूरसंचार नियामक ट्राई ने 10 स्पेक्ट्रम बैंड में 12,000 मेगाहर्ट्ज से अधिक रेडियो तरंगों की नीलामी के बारे में कीमत तय करने और नियम बनाने पर विचार के लिए मंगलवार को एक परामर्श पत्र जारी किया।
इस स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल 4जी और 5जी सेवाओं के लिए किया जाता है।
भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने अपने परामर्श पत्र में छह गीगाहर्ट्ज के स्पेक्ट्रम बैंड की नीलामी पर भी विचार आमंत्रित किए हैं। इस बैंड के लिए मोबाइल सेवा प्रदाता और वाई-फाई कंपनियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा है।
यह परामर्श पत्र दूरसंचार विभाग की तरफ से 15 मई को मांगे गए सुझाव के बाद आया है। उसमें स्पेक्ट्रम के आरक्षित मूल्य, बैंड प्लान, नीलाम किए जाने वाले स्पेक्ट्रम के बारे में राय मांगी गई थी।
दूरसंचार विभाग ने ट्राई से 600 मेगाहर्ट्ज बैंड पर भी सिफारिश मांगी है। यह बैंड अगस्त 2022 की नीलामी में उपलब्ध कराया गया था लेकिन दूरसंचार उपकरण और उपकरण परिवेश के विकसित न होने के कारण बिक नहीं पाया था।
ट्राई का मानना है कि 600 मेगाहर्ट्ज बैंड ग्रामीण एवं दूरदराज के इलाकों में नेटवर्क कवरेज बढ़ाने और शहरी क्षेत्रों में इमारतों के भीतर नेटवर्क की कमी को दूर करने में मददगार हो सकता है।
परामर्श पत्र में 800, 900, 1800, 2100, 2300, 2500, 3300 और 26 गीगाहर्ट्ज बैंड पर भी राय मांगी गई है। इनमें से 700, 3300 और 26 गीगाहर्ट्ज बैंड का उपयोग फिलहाल 5जी सेवाओं के लिए किया जा रहा है, जबकि अन्य बैंड 4जी सेवाओं में इस्तेमाल होते हैं।
ट्राई ने कहा कि परामर्श पत्र पर टिप्पणियां 28 अक्टूबर तक भेजी जा सकती हैं और उन टिप्पणियों पर राय 11 नवंबर तक रखी जा सकती हैं।
सरकार ने पिछले साल जून में 10,522 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम को नीलामी के लिए रखा था जिसका आधार मूल्य 96,238 करोड़ रुपये था। लेकिन इसमें से केवल 141.40 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम ही 11,341 करोड़ रुपये में बिक पाया था।
भाषा प्रेम प्रेम रमण
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