नयी दिल्ली, 25 सितंबर (भाषा) नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बृहस्पतिवार को कहा कि हरित हाइड्रोजन क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) के लिए 4.33 करोड़ डॉलर की राशि आवंटित की गई है और 23 परियोजनाओं के लिए 1.3 करोड़ डॉलर की मंजूरी दी गई है।
मंत्री ने राष्ट्रीय राजधानी में ‘एसएंडपी ग्लोबल कमोडिटी इनसाइट्स’ द्वारा आयोजित ‘वर्ल्ड हाइड्रोजन इंडिया’ सम्मेलन को डिजिटल माध्यम से संबोधित करते हुए यह टिप्पणी की।
सरकार ने वर्ष 2023 में राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन की शुरुआत की थी, जिसके तहत 2030 तक प्रति वर्ष 50 लाख टन हरित हाइड्रोजन का उत्पादन करने का लक्ष्य रखा गया है। इस मिशन के लिए प्रारंभिक बजट 19,744 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है।
जोशी ने कहा कि 2030 तक प्रति वर्ष कम से कम 50 लाख टन हरित हाइड्रोजन उत्पादन के लक्ष्य को 125 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में वृद्धि से बल मिलेगा। अनुमान है कि इससे लगभग 100 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित होगा और 6,00,000 से अधिक रोजगार सृजित होंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने अनुसंधान एवं विकास के लिए 4.3 करोड़ डॉलर से अधिक आवंटित किए हैं और 23 परियोजनाओं के लिए 1.3 करोड़ डॉलर पहले ही स्वीकृत कर दिए हैं।’
अब तक 4,300 टन प्रति वर्ष से अधिक क्षमता वाली 19 हरित हाइड्रोजन उत्पादन परियोजनाएं चालू की जा चुकी हैं जो इस्पात और कांच निर्माण से लेकर रिफाइनरियों और परिवहन तक के क्षेत्रों में काम कर रही हैं।
मंत्री ने कहा, ‘हम इस्पात क्षेत्र में हरित हाइड्रोजन को शामिल करने के लिए पांच प्रायोगिक परियोजनाएं संचालित कर रहे हैं। परिवहन क्षेत्र में, पांच प्रायोगिक परियोजनाओं के तहत 10 प्रमुख मार्गों पर 37 हाइड्रोजन ईंधन वाले वाहन और नौ ईंधन भरने के लिए स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं।’
भाषा योगेश रमण
रमण
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
