नयी दिल्ली, 19 सितंबर (भाषा) भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) के संजय मूर्ति ने शुक्रवार को कहा कि लाभार्थी योजनाओं के ऑडिट के दौरान कई राज्यों में बड़ी संख्या में धोखाधड़ी के मामलों का पता लगाने में एआई (कृत्रिम मेधा) और एमएल (मशीन लर्निंग) ने मदद की है।
उन्होंने फोरेंसिक ऑडिट में ऐसे डिजिटल उपकरणों के व्यापक उपयोग पर जोर दिया।
कैग ने यहां राज्य वित्त सचिवों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकारें सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन ढांचे में अधिक दक्षता लाने के लिए तेजी से प्रौद्योगिकी को अपना रही हैं।
उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण सार्वजनिक वित्त आईटी अवसंरचना के लागू होने से न केवल राज्यों में डिजिटल उपस्थिति मजबूत होगी, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी।
इनमें एकीकृत वित्तीय प्रबंधन सूचना प्रणाली (आईएफएमआईएस), कार्य एवं लेखा प्रबंधन सूचना प्रणाली (डब्ल्यूएएमआईएस), सरकारी ई-खरीद मंच (जीईपीएनआईसी), ई-वाउचर प्रणाली और डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (डीआईएलआरएमपी) शामिल हैं।
मूर्ति ने कहा कि डिजिटलीकरण और एकीकरण से राज्यों के मासिक सिविल खातों को अंतिम रूप देने में सकारात्मक नतीजे पहले ही दिखाई दे रहे हैं।
उन्होंने कहा, ”हम जोखिम मूल्यांकन और दूरस्थ ऑडिट के लिए उपलब्ध विभिन्न नवीनतम तकनीकी समाधानों के इस्तेमाल को प्राथमिकता दे रहे हैं।”
मूर्ति ने कहा कि कैग ने कुछ राज्यों में जीएसटी, स्टांप और पंजीकरण, ई-खरीद, कार्य ऑडिट, डीबीटी योजनाओं का सफलतापूर्वक रिमोट ऑडिट किया है।
भाषा पाण्डेय रमण
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