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Saturday, 14 March, 2026
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जलवायु स्वास्थ्य जोखिमों से 25 साल में 1.5 लाख करोड़ डॉलर का नुकसान: डब्ल्यूईएफ रिपोर्ट

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नयी दिल्ली, 18 सितंबर (भाषा) जलवायु परिवर्तन से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों की वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था को उत्पादकता के स्तर पर अगले 25 साल में कम-से-कम 1.5 लाख करोड़ डॉलर (करीब 131 लाख करोड़ रुपये से अधिक) का नुकसान उठाना पड़ सकता है। बृहस्पतिवार को जारी एक अध्ययन रिपोर्ट में यह दावा किया गया।

विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) ने बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) के साथ मिलकर यह अध्ययन रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट में जलवायु परिवर्तन का खाद्य एवं कृषि, निर्मित पर्यावरण, स्वास्थ्य एवं देखभाल और बीमा क्षेत्रों पर पड़ने वाले असर का आकलन किया गया है।

जलवायु जोखिमों से अगले 25 वर्षों में अनुमानित 1.5 लाख करोड़ डॉलर का आर्थिक नुकसान केवल पहले तीन क्षेत्रों से जुड़ा है। इससे यह संकेत मिलता है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर वास्तविक बोझ इससे कहीं अधिक हो सकता है।

अध्ययन में कंपनियों से अपने कार्यबल की सेहत को बचाकर रखने, परिचालन में लचीलापन लाने और उत्पादकता की सुरक्षा के लिए अभी से कदम उठाने का आह्वान किया गया है ताकि जलवायु अनुकूलन का प्रबंधन किया जा सके।

डब्ल्यूईएफ के प्रमुख (जलवायु जुझारूपन) एरिक व्हाइट ने कहा, ‘‘कर्मचारियों के स्वास्थ्य की रक्षा अब कारोबारी निरंतरता और दीर्घकालिक मजबूती के लिए आवश्यक हो गई है। अनुकूलन में हर साल की देरी स्वास्थ्य और उत्पादकता का जोखिम बढ़ाती है तथा लागत भी बढ़ती है।’’

रिपोर्ट कहती है कि खाद्य एवं कृषि क्षेत्र में जलवायु जोखिमों की वजह से 740 अरब डॉलर तक का नुकसान वैश्विक खाद्य सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है, जबकि निर्मित पर्यावरण क्षेत्र में 570 अरब डॉलर और स्वास्थ्य क्षेत्र में 200 अरब डॉलर तक का नुकसान हो सकता है।

इसके साथ बीमा उद्योग को भी जलवायु जोखिम के चलते स्वास्थ्य दावों में तेज बढ़ोतरी का सामना करना पड़ सकता है।

रॉकफेलर फाउंडेशन के उपाध्यक्ष (स्वास्थ्य) नवीन राव ने कहा, ‘‘तापमान बढ़ने से लाखों नौकरियां असुरक्षित होती जा रही हैं या फिर पूरी तरह खत्म होती जा रही हैं। इससे परिवार बेहद गरीबी की स्थिति में धकेले जा रहे हैं।’’

रिपोर्ट कहती है कि जलवायु स्वास्थ्य अनुकूलन में जल्द निवेश करने वाली कंपनियां जोखिम घटाने के साथ नवाचार और विकास के नए अवसर भी हासिल कर सकती हैं। इसमें जलवायु-लचीली फसलें, गर्मी से बेअसर दवाएं, शीतलन प्रौद्योगिकी और बीमा के नए मॉडल जैसी पहल का उल्लेख किया गया है।

यह निष्कर्ष डब्ल्यूईएफ की ‘टिकाऊ विकास प्रभाव बैठक-2025’ से पहले जारी किया गया है, जबकि ब्राजील में होने वाले जलवायु शिखर सम्मेलन ‘सीओपी-30द्ध की तैयारियां तेज हो रही हैं।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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