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Saturday, 14 March, 2026
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आरबीआई ने नियामक प्रक्रिया में हितधारकों की भागीदारी मजबूत करने को परामर्श समूह का गठन किया

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मुंबई, 17 सितंबर (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को कहा कि उसने नियामक प्रक्रिया में संबंधित पक्षों की भागीदारी को मजबूत करने और उद्योग विशेषज्ञता का निरंतर लाभ उठाने के उद्देश्य से एक स्वतंत्र परामर्श समूह का गठन किया है।

नियमन पर गठित स्वतंत्र परामर्श समूह (एजीआर) में बाहरी विशेषज्ञ शामिल होंगे, ताकि नियामक समीक्षा प्रकोष्ठ (आरआरसी) के माध्यम से विनियमों की निश्चित समय पर होने वाली समीक्षा में उद्योग की प्रतिक्रिया को शामिल किया जा सके।

भारतीय स्टेट बैंक (आरबीआई) के प्रबंध निदेशक राणा आशुतोष कुमार सिंह परामर्श समूह की अध्यक्षता करेंगे।

एजीआर में आवश्यकतानुसार अतिरिक्त विशेषज्ञों को शामिल करने का प्रावधान होगा। इसकी प्रारंभिक अवधि तीन वर्ष होगी, जिसे दो वर्ष की अतिरिक्त अवधि के लिए नवीनीकृत किया जा सकेगा।

आरआरसी का कार्य यह सुनिश्चित करना है कि आरबीआई द्वारा जारी किए गए सभी नियमों की हर पांच से सात साल में एक पूरी और व्यवस्थित आंतरिक समीक्षा हो।

आरआरसी को नियमन विभाग में एक अक्टूबर 2025 से प्रभावी रूप से स्थापित किया जाएगा और यह नियमों की समीक्षा चरणबद्ध तरीके से करेगा।

भाषा योगेश रमण

रमण

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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