नयी दिल्ली, 11 सितंबर (भाषा) सरकार ने बृहस्पतिवार को कहा कि जीएसटी दरों में किए गए बदलाव से कोयले पर कर का बोझ घटेगा और बिजली उत्पादन की लागत में कमी आएगी।
पहले कोयले पर पांच प्रतिशत जीएसटी के साथ 400 रुपये प्रति टन क्षतिपूर्ति उपकर लगाया जाता था। अब जीएसटी परिषद ने उपकर को हटाने और कोयले पर जीएसटी दर को 18 प्रतिशत करने का फैसला किया है।
कोयला मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि कर सुधारों से ग्रेड जी-6 से जी-17 तक के कोयले पर कर घटने से बिजली क्षेत्र को औसतन 260 रुपये प्रति टन की बचत होगी। इससे बिजली उत्पादन लागत में 17–18 पैसे प्रति यूनिट की कमी आने का अनुमान है।
पहले समान उपकर की वजह से कम गुणवत्ता वाले और सस्ते कोयले पर कर बोझ अधिक था।
जी-11 ग्रेड वाले गैर-कोकिंग कोल पर कर 65.85 प्रतिशत तक पहुंच जाता था जबकि उच्च गुणवत्ता वाले जी-2 ग्रेड कोयले पर यह 35.64 प्रतिशत था। लेकिन अब सभी श्रेणियों वाले कोयले में कर की दर 39.81 प्रतिशत पर एकसमान हो गई है।
सरकार ने कहा कि यह सुधार घरेलू कोयले को आयातित कोयले के मुकाबले प्रतिस्पर्धी बनाएंगे और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देंगे। उपकर हटने से आयातित उच्च गुणवत्ता वाले कोयले की लागत घरेलू कोयले से कम पड़ने की स्थिति समाप्त होगी।
इसके अलावा जीएसटी दर बढ़ने से कोयला कंपनियां अब कच्चे माल से जुड़ी सेवाओं पर चुकाए गए टैक्स क्रेडिट का उपयोग कर पाएंगी जिससे उनकी फंसी हुई पूंजी मुक्त होगी।
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