नयी दिल्ली, दो सितंबर (भाषा) सीएमएआई ने मंगलवार को कहा कि प्रस्तावित जीएसटी सुधारों के तहत 2,500 रुपये से अधिक मूल्य के परिधानों पर कर बढ़ाकर 18 प्रतिशत के उच्च स्लैब में रखने के सरकार के प्रस्ताव से संगठित निर्माता और मध्यम वर्ग के उपभोक्ता प्रभावित होंगे।
भारतीय वस्त्र निर्माता संघ (सीएमएआई) ने एक बयान में कहा कि विभिन्न क्षेत्रों से बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद, ऐसी खबरें हैं कि 2,500 रुपये से अधिक मूल्य के परिधानों पर मौजूदा 12 प्रतिशत की जगह अब 18 प्रतिशत कर लगने की संभावना है।
एसोसिएशन ने कहा, ‘‘पहले ही अमेरिकी शुल्क संकट से जूझ रहे उद्योग के लिए यह फैसला मौत की घंटी साबित होगी।’’
मध्यम वर्ग के लिए आवश्यक ऊनी परिधानों की लगभग पूरी श्रृंखला की कीमत वर्तमान में 3,500 रुपये से 7,000 रुपये के बीच है। सीएमएआई ने कहा कि ऐसे परिधानों को 18 प्रतिशत की कर दर में डालने का मतलब होगा कि मध्यम वर्ग के भारतीयों को कड़ाके की ठंड में ज्यादा कर देना होगा।
सीएमएआई भारतीय परिधान उद्योग का एक संघ है, जिसके 5,000 से ज़्यादा सदस्य हैं। यह 35,000 से ज़्यादा खुदरा विक्रेताओं को सेवाएं प्रदान करता है। इसके सदस्यों में निर्माता, निर्यातक, ब्रांड और सहायक उद्योग शामिल हैं।
भाषा राजेश राजेश पाण्डेय
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