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Sunday, 8 March, 2026
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अमेरिकी शुल्क के कारण मेंथा उद्योग संकट में

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रामपुर (उप्र), 30 अगस्त (भाषा) अमेरिका के भारत से आयातित सामानों पर लगाए गए 50 प्रतिशत शुल्क के कारण मेंथा तेल उद्योग एक बड़े संकट का सामना कर रहा है। निर्यातकों ने कहा कि इस शुल्क के कारण उद्योग पर निर्भर हजारों किसानों और श्रमिकों की आजीविका पर भी खतरा मंडरा रहा है।

मेंथा तेल एक सुगंधित यौगिक है जिसका उपयोग विभिन्न प्रकार के उत्पाद बनाने के लिए कच्चे माल के रूप में किया जाता है।

एक प्रमुख निर्यातक अमृत कपूर ने बताया कि कई ऑर्डर रोक दिए गए हैं या रद्द कर दिए गए हैं।

उन्होंने लागत पर पड़ने वाले सीधे असर के बारे में कहा, ”हमारा एक उत्पाद जिसकी कीमत 20 डॉलर है, 50 प्रतिशत शुल्क के कारण रातों रात 30 डॉलर का हो गया। वहां के खरीदार यह नहीं समझ पा रहे हैं कि भारत से 30 डॉलर का उत्पाद कैसे खरीदा जाए। इसलिए, ऑर्डर रुके हुए हैं। कारखाने में माल बन रहा है, और हमें नहीं पता कि यह कब बाहर जाएगा।”

कपूर ने किसानों और श्रमिकों पर पड़ने वाले व्यापक प्रभावों को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा, ”10 लाख से ज्यादा किसान भाई इस उद्योग से जुड़े हैं। उन्हें पर्याप्त पैसा नहीं मिल पाएगा, और मुझे लगता है कि उन्हें अपनी लागत भी वापस नहीं मिलेगी।”

उन्होंने रोजगार के बारे में भी चिंता जताते हुए कहा, ”अगर अमेरिका का यह व्यवहार जारी रहता है और हमारा उत्पादन कम होता है, तो हो सकता है कि आने वाले समय में हमें कारखानों में श्रमिकों की संख्या कम करनी पड़े।”

भारतीय उद्योग महासंघ की रामपुर इकाई के अध्यक्ष शिरीष गुप्ता ने इस शुल्क को दबाव बनाने की रणनीति बताया और सरकार की प्रतिक्रिया पर विश्वास व्यक्त किया।

उन्होंने कहा, ”सरकार को उन उद्योगों के लिए योजनाएं बनानी चाहिए जो शुल्क के कारण खतरे में हैं, ताकि वे बंद न हों और लोगों की आजीविका पर संकट न आए।”

उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें विश्वास है कि यह एक अस्थायी चरण है और जल्द ही एक सकारात्मक परिणाम सामने आएगा।

भाषा सं आनन्द राजकुमार योगेश पाण्डेय

पाण्डेय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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