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Friday, 29 August, 2025
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समाज की समस्याओं को समझकर संवेदनशील निर्णय लेना न्यायपालिका का दायित्व : राज्यपाल

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लखनऊ, 29 अगस्त (भाषा) उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने शुक्रवार को कहा कि न्यायपालिका का दायित्व केवल कानून की व्याख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज की समस्याओं को समझकर संवेदनशील निर्णय लेना भी आवश्यक है।

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल पटेल से आज राजभवन में सिविल न्यायाधीश (जूनियर डिवीजन) 2022 बैच के 70 नवनियुक्त प्रशिक्षु सिविल न्यायाधीशों का शिष्टाचार भेंट एवं संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया।

राजभवन से जारी बयान के अनुसार उन्होंने अपने संबोधन में कहा “कई बार ऐसे प्रकरण सामने आते हैं, जिन पर कोई स्पष्ट कानून नहीं होता। ऐसे मामलों में न्यायाधीश को अपने विवेक, निष्पक्षता और मानवीय दृष्टिकोण से निर्णय लेना पड़ता है।”

उन्होंने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि न्यायपालिका का दायित्व केवल कानून की व्याख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज की समस्याओं को समझकर संवेदनशील निर्णय लेना भी आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान युग तकनीक का युग है, इसलिए सही निर्णय हेतु तकनीक का उपयोग व हर मामले को बारीकी से देखना आवश्यक है। उन्होंने प्रशिक्षु न्यायाधीशों को कहा कि निर्णय देते समय विभिन्न प्रकार के दबाव आ सकते हैं, परंतु निष्पक्ष रहकर ही सही न्याय किया जा सकता है।

राज्यपाल ने अपने जनपद भ्रमण के दौरान प्राप्त अनुभव साझा करते हुए कहा कि जेलों में बंद अधिकांश कैदी दहेज प्रथा, भूमि विवाद तथा धोखाधड़ी जैसे मामलों से जुड़े पाए जाते हैं।

उन्होंने कहा कि इन अपराधों की रोकथाम के लिए समाज में जागरूकता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सुझाव दिया कि जनपद स्तर पर, विशेषकर महिलाओं, बेटियों तथा विश्वविद्यालयों में ऐसे मुद्दों पर चर्चा और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए, ताकि लोगों को इन अपराधों के परिणामों के प्रति जागरूक किया जा सके।

पटेल ने प्रशिक्षुओं को सलाह दी कि वे हमेशा जनता की समस्याओं को सुनें, सहानुभूति रखें, और समाज से जुड़े रहें। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति किसी भी पद पर हो, लेकिन वे समाज का हिस्सा होते हैं, उनका धरती से जुड़ाव होना चाहिए।

इस अवसर पर न्यायिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान के निदेशक दिवेश चंद्र सामंत ने संस्थान की स्थापना, उपलब्धियों, प्रशिक्षण के अनुभव एवं नवाचारों की जानकारी राज्यपाल को दी।

प्रशिक्षु न्यायाधीशों ने भी अपने प्रशिक्षण अनुभव साझा किए और न्यायिक शिक्षा, मानवीय मूल्यों तथा संवेदनशीलता के महत्व पर प्रकाश डाला।

भाषा आनन्द नरेश

नरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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