मुंबई, 26 अगस्त (भाषा) मुंबई उच्च न्यायालय ने एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले के आरोपी रमेश गाइचोर को अपने बीमार पिता से मिलने के लिए तीन दिन की अंतरिम जमानत दी है।
अदालत ने कहा कि इस मामले में गिरफ्तार होने के बाद वह पिछले पांच वर्षों में अपने बीमार पिता से मिलने नहीं जा सका।
न्यायमूर्ति ए. एस. गडकरी और न्यायमूर्ति राजेश पाटिल की पीठ ने 25,000 रुपये की नकद जमानत राशि जमा कराने के बाद गाइचोर को तीन दिन (नो सितंबर से 11 सितंबर) के लिए जेल से रिहा करने का आदेश दिया है।
अदालत ने कहा कि सितंबर 2020 में गिरफ्तार होने के बाद से गाइचोर अपने 76 वर्षीय पिता से नहीं मिल पाया है।
गाइचोर ने एक विशेष अदालत द्वारा उसके पिता की देखभाल करने के लिए दो सप्ताह की अंतरिम जमानत देने की उनकी याचिका खारिज किए जाने के बाद इस महीने की शुरुआत में उच्च न्यायालय का रुख किया था।
विशेष अदालत ने कहा था कि रमेश गाइचोर वरिष्ठ नागरिकों में आम तौर पर पाई जाने वाली उम्र संबंधी बीमारियों से पीड़ित थे।
अभियोजन पक्ष ने दावा किया था कि रमेश गाइचोर प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) समूह का सदस्य था।
पुणे में 31 दिसंबर, 2017 को आयोजित एल्गार परिषद सम्मेलन में कथित तौर पर भड़काऊ भाषण दिए जाने के बाद गाइचोर और अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस का दावा है कि इन भाषणों के कारण अगले दिन शहर के बाहरी इलाके में स्थित कोरेगांव-भीमा युद्ध स्मारक के पास हिंसा भड़की थी।
गाइचोर वर्तमान में नवी मुंबई के तलोजा सेंट्रल जेल में बंद है।
भाषा प्रीति संतोष
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