लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में भर्ती प्रक्रिया भ्रष्टाचार, पक्षपात और भेदभाव से ग्रसित थी, जिसने युवाओं के सपनों को तोड़ा और कानून-व्यवस्था को कमजोर किया.
उन्होंने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में यूपी पुलिस टेलीकॉम विभाग में चुने गए 1,494 असिस्टेंट ऑपरेटर्स को नियुक्ति पत्र वितरित किए.
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व की भर्ती पद्धति के कारण प्रदेश में दंगे, आतंकी हमले और भय का माहौल बना, जिसका उदाहरण अयोध्या, काशी, लखनऊ और रामपुर की घटनाओं से मिलता है. कार्यक्रम में उन्होंने कई अभ्यर्थियों को खुद नियुक्ति पत्र सौंपे.
आज उत्तर प्रदेश पुलिस एक मॉडल बनी है…
उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा निष्पक्ष एवं पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के अंतर्गत आज लखनऊ में उत्तर प्रदेश पुलिस दूरसंचार विभाग के लिए चयनित 1,374 सहायक परिचालकों एवं 120 कर्मशाला कर्मचारियों को नियुक्ति-पत्र वितरित… pic.twitter.com/mEQ9NrGYx1
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) August 3, 2025
योगी आदित्यनाथ ने कहा, “2017 में जब डबल इंजन की सरकार बनी तो पहला बड़ा कदम भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाना था। इसके लिए पुलिस भर्ती बोर्ड को मजबूत किया गया. नतीजतन आज उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती और सरकारी नौकरियां देने में देश में पहले स्थान पर है. अब तक 8.5 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी जा चुकी है, जो पूरे देश में सर्वाधिक है.”
उन्होंने कहा कि 2017 के बाद पुलिस भर्ती प्रक्रिया में आए ऐतिहासिक बदलाव केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि ये उत्तर प्रदेश की नई पहचान, सुरक्षा और विश्वास का प्रतीक हैं. अब तक 2,17,500 से अधिक पुलिसकर्मियों की पारदर्शी प्रक्रिया से भर्ती की गई है, जो देश में सबसे ज्यादा है.
सीएम योगी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बनी बीजेपी सरकार ने भर्ती बोर्ड को सशक्त किया और यह तय किया कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को जवाबदेह बनाया जाए। आज यूपी की भर्ती प्रक्रिया पूरे देश के लिए मॉडल बन चुकी है.
उन्होंने कहा कि पारदर्शी भर्ती से निवेश भी बढ़ा, जिससे लगभग 2 करोड़ युवाओं को अपने ही जिले में रोजगार के अवसर मिले. आउटसोर्सिंग, तकनीक और नीतिगत फैसलों के जरिए यूपी आज देश की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बन गया है.
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि 2017-18 में जब पहली भर्ती निकली, तब प्रशिक्षण क्षमता बहुत सीमित थी. पहले केवल 3,000 पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित किया जा सकता था, लेकिन अब यूपी पुलिस के प्रशिक्षण संस्थानों में 60,244 अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था हो चुकी है.
