(गुरदीप सिंह )
सिंगापुर, 23 अगस्त (भाषा) सिंगापुर अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र (एसआईएमसी) के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि भारत को व्यापार और अनुबंध विवादों के समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों का एक मजबूत समूह बनाना होगा।
एसआईएमसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी चुआन वी मेंग ने शुक्रवार को ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘हम भारत में मध्यस्थता मामलों की बढ़ती संख्या देख रहे हैं। भारत एक वैश्विक बाजार व वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का एक प्रमुख सदस्य है। इसका मतलब है कि देश में मध्यस्थता क्षमता का निर्माण करने की तत्काल आवश्यकता है।”
उन्होंने कहा कि मध्यस्थता विवादों को सुलझाने का पसंदीदा तरीका बनता जा रहा है क्योंकि यह तेज और कम खर्चीला है। एसआईएमसी बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए भारत के कानून विशेषज्ञों समेत अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम फिर से शुरू करने की योजना बना रहा है।
केंद्र ने इससे पहले 2018 और 2023 में भारत में ऐसे दो सत्र आयोजित किए थे।
चुआन ने कहा कि एसआईएमसी ने विवाद समाधान को बढ़ावा देने के लिए हैदराबाद में स्थित अंतरराष्ट्रीय माध्यस्थम एवं मध्यस्थता केंद्र जैसे भारतीय संगठनों के साथ काम किया है।
उन्होंने कहा कि भारत ने 2018 में वाणिज्यिक न्यायालय अधिनियम में संशोधन करके और मध्यस्थता अधिनियम 2023 पारित करके मध्यस्थता को प्राथमिक विवाद समाधान माध्यम के रूप में संस्थागत बनाने के लिए बड़े कदम उठाए हैं।
भाषा जोहेब प्रशांत
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