(कृष्ण)
नयी दिल्ली, 15 दिसंबर (भाषा) विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की अग्रणी स्वास्थ्य कार्यकर्ता ‘आशा’ का डिजिटल सशक्तीकरण और कौशल उन्नयन देश की ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा को बदलने में महत्वपूर्ण हो सकता है।
वर्ष 2013 में शुरू किए गए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत भर्ती की गई मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता (आशा) सुरक्षित तौर तरीकों को बढ़ावा देकर समुदाय में जागरूकता पैदा करती हैं और लोगों को सेवाओं तक पहुंचाने में मदद करती हैं।
डच प्रकाशन गृह और वैज्ञानिक, तकनीकी और चिकित्सा जानकारी के प्रसारक ‘एल्सेवियर’ ने 2022 में केंद्र सरकार के साथ ‘डिजिटल इनोवेशन एंड इंटरवेंशन फॉर सस्टेनेबल हेल्थटेक एक्शन’ या (दिशा) नामक एक डिजिटल स्वास्थ्य पायलट परियोजना में सहयोग किया। इस प्रकाशन गृह के तहत ‘द लांसेट’ जैसी 2,900 से अधिक पत्रिकाएं शामिल हैं।
‘एल्सेवियर’ के ‘हेल्थ सॉल्यूशंस-इंडिया’ के प्रबंध निदेशक शंकर कौल ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा, ‘‘अगर हम आशा कार्यकर्ताओं को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने, उन्हें कौशल प्रदान करने, उन्हें मान्यता देने और पुरस्कृत करते हैं, तो अंततः प्राथमिक स्तर की जांच चिकित्सा अधिकारियों पर बोझ नहीं बनेगी। इससे भारत में ग्रामीण स्वास्थ्य की तस्वीर को बदलने में मदद मिल सकती है।’’
‘दिशा’ का उद्देश्य आशा कार्यकर्ताओं को सशक्त बनाने के लिए ‘एल्सेवियर’ द्वारा विकसित कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित उपकरणों का इस्तेमाल करना है। ऐसा ही एक उपकरण ‘क्लिनिकलपैथ प्राइमरी केयर इंडिया’ है, जो नैदानिक निर्णय लेने के लिए एक सहायक उपकरण है। इसका उद्देश्य ‘‘स्वास्थ्य सेवा के मामले में शहरी-ग्रामीण क्षेत्र के विभाजन को पाटना’’ और ‘‘देश के सबसे दूरदराज के क्षेत्रों में विशेषज्ञ-स्तरीय जांच और मूल्यांकन क्षमताओं को लाना’’ है।
नीति आयोग द्वारा प्रायोजित एक व्यवहार्यता अध्ययन ने उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में उपकरण की ‘‘उपयोगिता और मानक उपचार दिशानिर्देशों के पालन’’ का मूल्यांकन किया। 2021 की रिपोर्ट में पाया गया कि एआई-आधारित सहयोग ने स्थानीय दिशानिर्देशों को ‘‘पूरी निष्ठा के साथ’’ परिवर्तित करने की क्षमता का प्रदर्शन करके ‘‘शानदार कार्य सहायक’’ के रूप में काम किया।
इसमें कहा गया कि यह उपकरण समय के साथ उच्च गुणवत्ता वाले नैदानिक डेटा सेट भी तैयार कर सकता है, जो देखभाल वितरण, रेफरल और परिणामों पर जिला-स्तरीय डेटा को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।
कौल ने कहा कि इस डिजाइन की वर्तमान में ‘नेशनल वन हेल्थ मिशन’ द्वारा समीक्षा की जा रही है। जुलाई 2024 में प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय के तहत शुरू किया गया यह मिशन महामारी की तैयारियों से संबंधित है।
लगातार नवाचार-संचालित स्वास्थ्य सेवा व्यवसायों का नेतृत्व कर चुके कौल ने कहा कि अंततः ‘क्लिनिकलपैथ प्राइमरी केयर इंडिया’ स्वास्थ्य सेवा को जमीनी स्तर तक ले जाने का एक साधन प्रदान करता है।
‘एल्सेवियर’ भी उन संगठनों में से एक है, जिसने सरकार की ‘वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन’ (ओएनओएस) योजना पर हस्ताक्षर किए हैं, जो एक जनवरी, 2025 से प्रभावी होगी। पहले चरण में, 6,300 से अधिक उच्च शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों को विज्ञान, प्रबंधन और मानविकी सहित अन्य क्षेत्रों को कवर करने वाली 13,400 से अधिक अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं तक पहुंच प्रदान की जाएगी।
कौल ने कहा, ‘‘मैं इस योजना को अवसर कहूंगा, क्योंकि यह अनुसंधान को लोकतांत्रिक बनाने में मदद करता है।’’ उन्होंने कहा कि इससे उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा। कौल ने कहा, ‘‘देश में बहुत सारे अनुसंधान हो रहे हैं, लेकिन अब सवाल यह है कि क्या उस मात्रा के अनुसंधान को उच्च प्रभाव वाले अनुसंधान में भी बढ़ाया जा सकता है। मुझे लगता है कि इस पहलू से यह एक बहुत बड़ा कदम है।’’
‘एल्सेवियर’ द्वारा विकसित एक अन्य नैदानिक निर्णय सहयोग उपकरण ‘क्लिनिकलकी एआई’ है, जो एक खोज उपकरण है जिसके साथ संवाद किया जा सकता है। इसे शुरू में नवंबर 2023 में जारी किया गया था।
क्लिनिकल सॉल्यूशंस-एल्सेवियर की कंट्री डायरेक्टर हेमा जगोटा ने कहा, ‘‘क्लिनिकलकी एआई’’ मूल रूप से एक संवादात्मक, साक्ष्य-आधारित खोज इंटरफ़ेस है जो चिकित्सक को उनके द्वारा दर्ज की गई क्वेरी के आधार पर नवीनतम जानकारी प्राप्त करने में सक्षम बनाता है।’’
जगोटा ने कहा कि यह तकनीकी समाधान ‘जिम्मेदार एआई’ सिद्धांतों पर भी जोर देता है, जिसमें ‘‘विश्वसनीय, समकक्षों द्वारा समीक्षित, प्रकाशित, उद्धृत करने योग्य सामग्री’’ पर विकसित किया जाना शामिल है।
भाषा आशीष सुभाष
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