(जैक एम रॉबिंसन एवं मार्टिन ब्रीड, फ्लिंडर्स विश्वविद्यालय)
एडिलेड, 18 अगस्त (द कन्वरसेशन) अच्छी मृदा का सीधा संबंध जीवन से है। पृथ्वी की 59 प्रतिशत प्रजातियां मृदा में ही रहती हैं। वे मृदा की गुणवत्ता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और अगर व्यापक रूप से बात करे तो ये प्रजातियां धरती की सेहत को भी दुरुस्त बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती हैं।
लेकिन यह महत्वपूर्ण संसाधन खतरे में है। वर्तमान में दुनिया की 75 प्रतिशत मृदा की गुणवत्ता खराब है। वनों की कटाई, पशुओं के अत्यधिक चरने, शहरीकरण और अन्य क्रियाकलापों के कारण यह आंकड़ा 2050 तक 90 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।
मृदा की गुणवत्ता में गिरावट न केवल जैव विविधता के लिए, बल्कि फसल उत्पादन जैसे कामों के लिए भी बड़ा जोखिम पैदा करती है।
मिट्टी में जीवन का पता लगाने और मापने के पारंपरिक तरीके अक्सर महंगे, समय लेने वाले होते हैं। ‘इकोअकाउस्टिक्स’ एक नवीन और गैर-विनाशकारी पहल है जो मृदा गुणवत्ता की निगरानी के तरीके को बदल सकती है।
हमारी शोध टीम ने ध्वनि के इस्तेमाल से मिट्टी में जीवन की निगरानी का एक सरल तरीका विकसित किया है। यह तकनीक दुनिया भर में मृदा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है। हमने पाया कि स्वस्थ मृदा विभिन्न जीवों से समृद्ध है और उसमें अलग-अलग ध्वनियां होती हैं या ‘‘ध्वनि परिदृश्य’’ प्रदर्शित करती है।
पृथ्वी के नीचे चटकने, ‘क्लिक’ और ‘पॉप’ जैसी ध्वनियां सुनाई देती हैं।
क्या है इकोअकाउस्टिक्स?
इकोअकाउस्टिक्स जानवरों, पौधों आदि द्वारा उत्पन्न की गई ध्वनियों का अध्ययन है। प्रौद्योगिकी से लैस यह अपेक्षाकृत नया विज्ञान है और इसका इस्तेमाल भूमि और जल पर पारिस्थितिकी प्रणालियों की निगरानी के लिए व्यापक रूप से किया जा रहा है।
अब आप क्रेडिट कार्ड के आकार का ऑडियो रिकॉर्डर पेड़ पर लटकाकर जानवरों की आवाज रिकॉर्ड कर सकते हैं। कई दिनों या हफ़्तों बाद उपकरण को उतारकर रिकॉर्डिंग का विश्लेषण किया जा सकता है।
अब तक वैज्ञानिकों ने चमगादड़, पक्षी, मेंढक और जीव जंतुओं की ध्वनियां प्राप्त की हैं। ये ध्वनियां जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र की गतिशीलता के बारे में मूल्यवान जानकारी प्रदान करती हैं।
इसी सिद्धांत और उपकरण का इस्तेमाल अब मृदा के लिए भी किया जा रहा है। शोधकर्ता जमीन में जांच करने वाले उपकरणों से जुड़े रिकॉर्डर और विशेष माइक्रोफोन का इस्तेमाल करके मृदा की आवाज़ों का पता लगाने का काम प्रारंभ कर रहे हैं। ये उपकरण उन ध्वनिक कंपन को रिकॉर्ड करते हैं जो मिट्टी में रहने वाले जीवों के चलने से पैदा होते हैं।
इन रिकॉर्ड में चटकने, क्लिक करने और पॉप जैसी आवाजें सुनाई देती हैं। स्वस्थ मिट्टी में इन ध्वनियों की विविधता क्षतिग्रस्त मिट्टी की तुलना में अधिक होती है। आप खराब मृदा को नीरस पार्टी की तरह मान सकते हैं, जबकि समृद्ध मृदा में आपको अच्छा कंपन और आवा सुनाई देगी।
प्रारंभिक जांच और अंतर्दृष्टि
सभी जीवित जीव जंतु ध्वनियां उत्पन्न करते हैं। यह जानबूझकर किया जा सकता है, जैसे पक्षी अपने साथी को आकर्षित करने के लिए गाते हैं और चमगादड़ अपने शिकार का कुशलतापूर्वक शिकार करने के लिए प्रतिध्वनि उत्पन्न करते हैं। ध्वनि आकस्मिक भी पैदा हो सकती है जैसे केंचुओं का मिट्टी में घूमना।
इस प्रकार की आकस्मिक ध्वनियां मृदा पारिस्थितिकी तंत्र के बारे में बहुत कुछ बता सकती हैं।
ऑस्ट्रेलिया के वनों पर हमारा नया शोध आज ‘जर्नल ऑफ एप्लाइड इकोलॉजी’ में प्रकाशित हुआ है। यह अध्ययन दिखाता है कि मृदा ‘इकोअकाउस्टिक्स’ मृदा प्राणियों की प्रचुरता और क्रियाशीलता को प्रभावी ढंग से प्रतिबिंबित करता है। साथ ही इससे यह भी पता चलता है कि मृदा की गुणवत्ता खराब है या नहीं।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
मृदा ‘इकोअकाउस्टिक्स’ से कई व्यावहारिक प्रयोग किए जा सकते हैं। इसका उपयोग मृदा पुनर्स्थापन प्रयासों की प्रभावशीलता की निगरानी के लिए किया जा सकता है, जिससे जमीन के मालिकों और किसानों को अपनी मिट्टी की गुणवत्ता का आकलन करने में मदद मिलती है। उदाहरण के लिए, यह ऐसी जमीनों की पहचान कर सकता है जिसमें केंचुओं की संख्या कम है। केंचुओं की संख्या मृदा के पोषक चक्रण के लिए महत्वपूर्ण है।
द कन्वरसेशन शोभना सिम्मी
सिम्मी
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