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Monday, 2 February, 2026
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नस्लवाद, भेदभाव मस्तिष्क नेटवर्क में परिवर्तन के कारण उम्र से पहले बूढ़ा कर देते हैं : अध्ययन

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(नेगर फानी, एमोरी यूनिवर्सिटी और नाथनियल हार्नेट, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी)

अटलांटा/कैम्ब्रिज (अमेरिका), 8 अगस्त (द कन्वरसेशन) नस्लवाद लोगों के जीवन से समय चुरा लेता है और इसका कारण संभवतः यह है कि वह मन में एक स्थान घेर लेता है। जामा नेटवर्क ओपन जर्नल में प्रकाशित एक नए अध्ययन में, हमारी टीम ने दिखाया कि मस्तिष्क पर नस्लवाद का प्रभाव तेजी से उम्र बढ़ने से जुड़ा था, जो सेलुलर स्तर पर देखा गया था।

जिन अश्वेत महिलाओं को अक्सर नस्लवाद का सामना करना पड़ा, उन्होंने चिंतन और सतर्कता से जुड़े मस्तिष्क नेटवर्क में मजबूत संबंध दिखाए। हमने पाया कि यह, बदले में, जैविक उम्र तेजी से बढ़ने से जुड़ा था।

हम न्यूरोसाइंटिस्ट हैं जो मस्तिष्क और शरीर पर तनाव के प्रभावों के बारे में हमारे सवालों का जवाब देने के लिए स्व-रिपोर्ट किए गए डेटा और मस्तिष्क स्कैन जैसे जैविक माप सहित विभिन्न तरीकों का उपयोग करते हैं। हम इस डेटा का उपयोग लोगों को इस तनाव से निपटने में मदद करने के लिए भी करते हैं।

यह क्यों मायने रखती है

उम्र बढ़ना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है. हालाँकि, तनाव जैविक घड़ी को तेज़ कर सकता है, जिससे लोग उम्र बढ़ने से संबंधित बीमारियों, हृदय रोग से लेकर मधुमेह और मनोभ्रंश तक के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं।

महामारी विज्ञान के अध्ययन लगातार दर्शाते हैं कि अश्वेत लोग श्वेत लोगों की तुलना में कम उम्र में ही उम्र बढ़ने से संबंधित इन स्वास्थ्य समस्याओं का अनुभव करते हैं। नए अध्ययन मस्तिष्क पर उम्र बढ़ने के फोकल प्रभावों को भी दिखाते हैं, जो अश्वेत और श्वेत आबादी के बीच मस्तिष्क की उम्र बढ़ने में असमानताओं का संकेत देते हैं।

नस्लीय भेदभाव सहित नस्ल संबंधी तनाव, जैविक स्तर पर लोगों की उम्र बढ़ने की दर को प्रभावित करते हैं। ये अनुभव तनाव प्रतिक्रिया प्रणाली को सक्रिय करते हैं और मस्तिष्क क्षेत्रों में अधिक गतिविधि से जुड़े होते हैं जो आने वाले खतरों को संसाधित करते हैं। हालाँकि, अब तक, हमारे क्षेत्र के शोधकर्ता यह नहीं समझ पाए हैं कि नस्लवाद से जुड़े मस्तिष्क परिवर्तन तेजी से उम्र बढ़ने में कैसे योगदान करते हैं।

नस्लीय भेदभाव एक सर्वव्यापी तनाव है जिस पर अक्सर ध्यान नहीं दिया जाता है। ऐसा लग सकता है कि कोई डॉक्टर किसी अश्वेत मरीज़ के दर्द के स्तर पर सवाल उठा रहा है और दर्द की दवा नहीं दे रहा है, या कोई शिक्षक किसी अश्वेत बच्चे को भला-बुरा कह रहा है। यह एक निरंतर तनाव है जिसका सामना अश्वेत लोगों को कम उम्र से ही करना पड़ता है।

चिंतन – किसी घटना को बार-बार याद करना और उसका विश्लेषण करना – और सतर्कता, जिसका अर्थ है भविष्य के खतरों के प्रति सतर्क रहना, इन तनावों की प्रतिक्रियाओं का मुकाबला करना संभव है। लेकिन चिंतन और सतर्कता में ऊर्जा लगती है, और इस बढ़े हुए ऊर्जा व्यय की एक जैविक लागत होती है।

अश्वेत महिलाओं के हमारे अध्ययन में, हमने पाया कि अधिक बार होने वाला नस्लीय भेदभाव दो प्रमुख क्षेत्रों के बीच अधिक कनेक्टिविटी से जुड़ा था। एक, जिसे लोकस कोएर्यूलस कहा जाता है, मस्तिष्क का एक गहरा क्षेत्र, जो तनाव प्रतिक्रिया को सक्रिय करता है, उत्तेजना और सतर्कता को बढ़ावा देता है। दूसरा प्रीक्यूनस है, मस्तिष्क नेटवर्क का एक प्रमुख नोड जो तब सक्रिय होता है जब हम अपने अनुभवों के बारे में सोचते हैं और अपनी भावनाओं को आंतरिक करते हैं – या दबाते हैं।

ये मस्तिष्क परिवर्तन, बदले में, एक एपिजेनेटिक ‘‘घड़ी’’ द्वारा मापी गई त्वरित सेलुलर उम्र बढ़ने से जुड़े थे। एपिजेनेटिक्स पर्यावरण से हमारे डीएनए में होने वाले परिवर्तनों को संदर्भित करता है। एपिजेनेटिक घड़ियाँ यह आकलन करती हैं कि आणविक स्तर पर पर्यावरण हमारी उम्र बढ़ने को कैसे प्रभावित करता है।

उच्च घड़ी मान इंगित करते हैं कि किसी की जैविक आयु उनकी कालानुक्रमिक आयु से अधिक है। दूसरे शब्दों में, नस्लवादी अनुभव लोगों के दिमाग में जो जगह घेरते हैं उसकी एक कीमत होती है, जो जीवन काल को छोटा कर सकती है।

क्या अभी तक पता नहीं चल पाया है

हालाँकि हमने नस्लवाद, मस्तिष्क कनेक्टिविटी में बदलाव और त्वरित उम्र बढ़ने के बीच संबंध देखा, हमने वास्तविक समय में चिंतन और सतर्कता जैसी मुकाबला प्रतिक्रियाओं को नहीं मापा, जिसका अर्थ है कि लोग उन्हें अनुभव कर रहे थे।

हम यह भी नहीं जानते कि आस-पड़ोस के नुकसान, लिंग और कामुकता जैसे अन्य कारक कैसे तेजी से उम्र बढ़ने और संबंधित स्वास्थ्य असमानताओं को प्रभावित करते हैं।

आगे क्या होगा

हमारा अगला कदम इन शोध प्रश्नों पर गहराई से विचार करने के लिए शारीरिक माप और न्यूरोइमेजिंग के साथ-साथ रोजमर्रा के नस्लवाद के वास्तविक समय माप का उपयोग करना है।

हम जानना चाहते हैं कि विभिन्न प्रकार के नस्लीय भेदभाव और मुकाबला करने की शैलियाँ मस्तिष्क और शरीर की प्रतिक्रियाओं को कैसे प्रभावित करती हैं। इन मुद्दों को बेहतर ढंग से समझने से रोकथाम पर अधिक ध्यान दिया जा सकता है, जैसे ऐसे कार्यक्रम जो चिकित्सकों और शिक्षकों में निहित पूर्वाग्रह को लक्षित करते हैं। यह न्यूरोमॉड्यूलेशन जैसे हस्तक्षेपों को भी सूचित कर सकता है, जिसमें मस्तिष्क गतिविधि को उत्तेजित या बाधित करने के लिए बाहरी या आंतरिक उपकरणों का उपयोग शामिल है। न्यूरोमॉड्यूलेशन का उपयोग तनाव को कम करने के लिए एक चिकित्सा सहायता के रूप में किया जा सकता है।

द कन्वरसेशन एकता एकता

एकता

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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