(एहसान नूरोजिनेजाद, वेस्टर्न सिडनी विश्वविद्यालय और सईदाली मिरजालिली, टॉरेंस विश्वविद्यालय, ऑस्ट्रेलिया)
सिडनी, छह अगस्त (द कन्वरसेशन) कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) ने हमारे जीवन में कई तरीकों से क्रांति ला दी है, हमारे सोशल मीडिया पोस्ट को अनूठा बनाने से लेकर हमें वाहन चलाने के लिए आवश्यक निर्देश देने और हमारे स्वास्थ्य की निगरानी करने तक, जीवन के कई क्षेत्रों में अपनी जगह बना ली है।
हाल के वर्षों में, इस बात की उम्मीद बढ़ी हैं कि एआई जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक पर्यावरणीय समस्याओं से निपटने में मानव की मदद कर सकता है। एआई में कंप्यूटर का उपयोग कर उन्हें इंसानों की तरह सोचने के लिए तैयार करना शामिल है।
यह जटिल समस्याओं को हल कर सकता है और भारी मात्रा में डेटा का उपयोग अपने अनुसार कर सकता है।
ऐसे चार तरीके जिनसे एआई प्राकृतिक दुनिया की मदद कर सकता है–
ऊर्जा दक्षता :
एआई प्रणालियां ऊर्जा उपयोग को नियंत्रित और अनुकूलित कर सकती हैं। उदाहरण के लिए, एआई-संचालित ‘स्मार्ट ग्रिड’ उपभोक्ताओं की मांग को पूरा करने के लिए बिजली उत्पादन की निगरानी और प्रबंधन करते हैं, जिससे ऊर्जा लागत कम हो सकती है और अधिक कुशल ऊर्जा उपयोग संभव हो सकता है।
एआई बड़े वाणिज्यिक और औद्योगिक प्रणालियों द्वारा उपयोग की जाने वाली ऊर्जा को सुव्यवस्थित करने में भी मदद कर सकता है। उदाहरण के लिए, प्रौद्योगिकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी गूगल ने अपने डेटा केंद्रों को ठंडा करने के लिए आवश्यक ऊर्जा की मात्रा को 40 प्रतिशत तक कम करने के लिए एआई का उपयोग किया।
शहरी बुनियादी ढांचा :
एआई द्वारा संचालित अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियां पुनर्चक्रण दरों को बढ़ाने में मदद कर सकती हैं। उदाहरण के लिए ब्रिटेन में पुनर्चक्रण करने वाली कंपनी रीसाइकिलआई पुनर्चक्रण की मात्रा बढ़ाने के लिए एआई का उपयोग करती है – और इस तरह, लैंडफिल साइट पर दबाव घटाती है।
एआई-संचालित ”स्मार्ट सिटी” प्रौद्योगिकियां सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों को अधिक सुचारू रूप से चलाने में मदद करती हैं, जिससे भीड़भाड़ कम हो सकती है और वाहन उत्सर्जन न्यूनतम हो सकता है।
शहरों में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, आईबीएम सेंसर और उपग्रहों से मौसम और वायु प्रदूषण के आंकड़ों का विश्लेषण करने के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल करता है।
इससे अधिकारियों को प्रदूषण के स्रोतों का पता लगाने, वायु गुणवत्ता का पूर्वानुमान लगाने और स्वास्थ्य संबंधी चेतावनियां जारी करने में मदद मिल सकती है।
सतत एवं टिकाऊ कृषि :
कृषि में पहले से ही एआई-संचालित स्मार्ट मशीनों, रोबोट और सेंसर का उपयोग किया जा रहा है।
वे मौसम, मिट्टी और फसल की जरूरतों की वास्तविक समय पर निगरानी कर सकते हैं, जिससे पानी का बेहतर उपयोग हो सकता है और यह सुनिश्चित हो सकता है कि फसलों को केवल वही चीजें मिले जिसकी उन्हें जरूरत है। यह तकनीक कीटों की पहचान भी कर सकती है, जिससे फसलों पर रासायनिक कीटनाशकों के छिड़काव की ज़रूरत कम हो जाती है।
जलवायु परिवर्तन की स्थिति गंभीर होने के कारण, उम्मीद है कि एआई किसानों को फसल की कम पैदावार से बचने और अधिक लचीला बनने में मदद कर सकता है।
पर्यावरणीय निगरानी :
एआई प्रणाली बाढ़, जंगल में आग और अन्य प्राकृतिक खतरों का जल्दी और सटीक पूर्वानुमान लगा सकते हैं। इससे पर्यावरण और समुदायों दोनों, पर प्राकृतिक खतरों के प्रभाव को कम किया जा सकता है।
पर्यावरण में होने वाले बदलावों पर नजर रखने के लिए एआई का इस्तेमाल किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, यह कथित तौर पर हिमनदों में होने वाले बदलावों को मानव की तुलना में 10,000 गुना तेजी से माप सकता है।
लेकिन इसके नकारात्मक पहलू क्या हैं?
एआई की क्षमता को साकार करने का मार्ग कठिन है – और इस प्रौद्योगिकी की कई बड़ी कमियां भी हैं।
(द कन्वरसेशन) रवि कांत सुभाष
सुभाष
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