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Saturday, 31 January, 2026
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जयशंकर ने संघर्ष समाप्त करने के लिए संवाद, कूटनीति पर जोर दिया

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(फोटो के साथ)

वियनतियाने (लाओस), 27 जुलाई (भाषा) भारत ने युद्धग्रस्त गाजा में तनाव कम करने और संयम बरतने का आह्वान करने के साथ यूक्रेन में संघर्ष को समाप्त करने के लिए बातचीत और कूटनीति के महत्व पर शनिवार को जोर दिया।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन (आसियान) की बैठकों के तहत लाओस की राजधानी में 14वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (ईएएस) के विदेश मंत्रियों की बैठक को संबोधित करते हुए गाजा और यूक्रेन संघर्षों पर भारत के रुख पर प्रकाश डाला।

जयशंकर ने ईएएस प्रक्रिया, भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति के एक दशक और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की शांति एवं स्थिरता के लिए खुले समुद्री मार्ग के महत्व को रेखांकित करने के साथ दुनिया के दो सबसे गंभीर संघर्षों इजराइल-फलस्तीन और यूक्रेन-रूस के मुद्दों पर चर्चा की।

विदेश मंत्री ने अपने संबोधन के बाद ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘गाजा में तनाव कम करने और संयम बरतने का आह्वान किया। भारत फलस्तीन के लोगों को मानवीय सहायता देना जारी रखे हुए है। लाल सागर में वाणिज्यिक जहाजों पर हमले चिंताजनक हैं। भारत समुद्री नौवहन की सुरक्षा सुनिश्चित करने में स्वतंत्र रूप से योगदान दे रहा है।’’

भारत ने 15 जुलाई को फलस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी (यूएनआरडब्ल्यूए) को उसके मुख्य कार्यक्रमों और सेवाओं में सहयोग के लिए 25 करोड़ अमेरिकी डॉलर का योगदान दिया। यह भारत द्वारा प्रतिवर्ष दिए जाने वाले कुल 50 लाख अमेरिकी डॉलर की पहली किस्त थी।

कई मंचों पर भारत ने गाजा के लिए द्वि-राष्ट्र समाधान का समर्थन और मानवीय आधार पर गाजा में तनाव कम करने एवं संयम बरतने का आह्वान किया है।

यूक्रेन में संघर्ष पर विदेश मंत्री ने बातचीत और कूटनीति के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने अपने पोस्ट में कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से मुलाकात की। भारत हरसंभव तरीके से योगदान देने के लिए तैयार है।’’

जून में मोदी ने इटली में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान जेलेंस्की से मुलाकात की थी। बाद में प्रधानमंत्री ने रूस की अपनी आधिकारिक यात्रा के दौरान मॉस्को में राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात की।

जयशंकर ने कहा, ‘‘ईएएस हमें ऐसे समय में साथ लाने में महत्वपूर्ण है जब मतभेद तीखे हैं और हित विविध हैं। भारत हमेशा ईएएस प्रक्रिया के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर अडिग रहेगा।’’

भाषा आशीष नेत्रपाल

नेत्रपाल

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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