कोलंबो, 15 जुलाई (भाषा) श्रीलंका के उच्चतम न्यायालय ने मूल अधिकारों से जुड़ी याचिका सोमवार को खारिज कर दी जिसकी वजह से देश में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में देरी हो सकती थी।
प्रधान न्यायाधीश जयंत जयसूर्या की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने पेशे से वकील याचिकाकर्ता पर भी जुर्माना लगाया, जिसने चुनाव को स्थगित करने का अनुरोध करते हुए याचिका दायर की थी। उसने याचिका में दावा किया कि 2015 में किया गया 19वां संविधान संशोधन तय प्रक्रिया के तहत नहीं हुआ क्योंकि इसे अंगीकार करने के लिए कोई जनमत संग्रह नहीं कराया गया था।
यह दूसरी याचिका है जो 17 से 16 अक्टूबर को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के खिलाफ दायर की गई।
विपक्षी दलों का आरोप है कि ये याचिकाएं राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे की सरकार की ओर से दायर कराई जा रही हैं ताकि चुनाव में देरी हो और वह बिना चुनाव राष्ट्रपति बने रहें।
विपक्ष का आरोप है कि गोटाबाया राजपक्षे के बाद राष्ट्रपति बने 75वर्षीय विक्रमसिंघे चुनाव का सामना करने से डर रहे हैं। हालांकि, विक्रमसिंघे ने भरोसा दिया है कि निष्पक्ष निर्वाचन आयोग की देखरेख में समय पर चुनाव होंगे।
भाषा धीरज प्रशांत
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