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Saturday, 11 April, 2026
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बजरंग, विनेश को एशियाई खेलों में सीधा प्रवेश देने पर विवाद

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(अमनप्रीत  सिंह और अजय मसंद)

नयी दिल्ली, 18 जुलाई (भाषा) भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) की तदर्थ समिति ने मंगलवार को ओलंपिक पदक विजेता बजरंग पूनिया और विश्व चैम्पियनशिप पदक विजेता विनेश फोगाट को एशियाई खेलों में सीधे प्रवेश दिया जिसे दूसरे पहलवान और उनके कोच अदालत में चुनौती दे सकते हैं।

यह निर्णय हालांकि विभिन्न वर्गों के राष्ट्रीय मुख्य कोच की सहमति के बिना लिया गया।

  भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) द्वारा नियुक्त तदर्थ समिति ने एक परिपत्र में कहा कि उसने पहले ही पुरुषों की फ्रीस्टाइल 65 किग्रा और महिलाओं की 53 किग्रा में पहलवानों का चयन कर लिया है। इसके बावजूद तीनों शैलियों में से सभी छह वजन श्रेणियों में ट्रायल आयोजित किए जाएंगे।

तदर्थ समिति ने परिपत्र में बजरंग और विनेश का नाम नहीं लिया, लेकिन पैनल के सदस्य अशोक गर्ग ने ‘पीटीआई-भाषा’ से पुष्टि की कि दोनों पहलवानों को ट्रायल से छूट दी गई है।

गर्ग ने कहा, ‘‘ हां बजरंग और विनेश को छूट दी गयी है।’’

बजरंग 65 किग्रा वर्ग के चुनौती पेश करते हैं। वह डब्ल्यूएफआई के निवर्तमान अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह की गिरफ्तारी की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले छह पहलवानों में से एक हैं। वह इस समय किर्गिस्तान के इस्सिक-कुल में प्रशिक्षण ले रहे हैं।

जकार्ता एशियाई खेलों (2018) में स्वर्ण पदक जीतने वाली 53 किग्रा पहलवान विनेश हंगरी के बुडापेस्ट में प्रशिक्षण ले रही हैं।

इन दोनों पहलवानों ने क्रमश: पुरुष 65 किग्रा और महिला 53 किग्रा वर्ग में अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन उन्होंने विरोध प्रदर्शन के कारण इस साल किसी भी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भाग नहीं लिया है।

इस दौरान सुजीत कलाकल और अंतिम पंघाल ने इस वजन वर्ग में अच्छा प्रदर्शन किया है।

अंतिम पिछले साल भारत की पहली अंडर-20 विश्व चैंपियन बनी थी। उसने इस साल सीनियर एशियाई चैम्पियनशिप में रजत पदक भी जीता है।

सुजीत मौजूदा समय में अंडर 23 और अंडर 20 वर्ग में एशियाई चैंपियन हैं। उन्होंने अंडर 20 विश्व चैम्पियनशिप में कांस्य भी जीता है।

तदर्थ समिति ने हालांकि विरोध करने वाले चार अन्य पहलवानों साक्षी मलिक, उनके पति सत्यव्रत कादियान, जितेंद्र किन्हा और बजरंग की पत्नी संगीता फोगाट को किसी तरह की छूट नहीं दी है।

तदर्थ समिति ने 23 सितंबर से चीन के हांगझोउ में होने वाले एशियाई खेलों के लिए कुश्ती टीम का चयन करने के लिए ट्रायल से चार दिन पहले यह निर्णय लिया।

  ग्रीको-रोमन (60किग्रा, 67किग्रा, 77किग्रा, 87किग्रा, 97किग्रा, 130किग्रा)  और महिलाओं (50किग्रा, 53किग्रा, 57किग्रा, 62किग्रा, 68किग्रा, 76किग्रा)  के फ्रीस्टाइल  ट्रायल 22 जुलाई को होने हैं, जबकि पुरुषों (57किग्रा, 65किग्रा, 74किग्रा, 86किग्रा, 97किग्रा, 125किग्रा)  के फ्रीस्टाइल ट्रायल 23 जुलाई को नयी दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में होंगे।

विनेश ने बीमारी के कारण हाल ही में बुडापेस्ट में रैंकिंग सीरीज की प्रतियोगिता से नाम वापस ले लिया था।

बजरंग और विनेश के साथ विरोध करने वाले चार अन्य पहलवानों 2016 रियो ओलंपिक पदक विजेता साक्षी, उनके पति कादियान, संगीता और किन्हा  ने एशियाई खेलों और विश्व चैंपियनशिप ट्रायल की तैयारी के लिए 10 अगस्त तक का समय मांगा था।

डब्ल्यूएफआई के दिशानिर्देशों के अनुसार सभी भार वर्गों में चयन ट्रायल अनिवार्य है। चयन समिति के पास हालांकि मुख्य कोच/विदेशी विशेषज्ञ की सिफारिश पर बिना ट्रायल के ओलंपिक/विश्व चैम्पियनशिप के पदक विजेताओं जैसे प्रतिष्ठित खिलाड़ियों का चयन करने का विवेकाधिकार होगा।

बजरंग और विनेश दोनों उस मानदंड में फिट बैठते हैं लेकिन इस मामले में पुरुषों के फ्रीस्टाइल राष्ट्रीय कोच जगमंदर सिंह और महिलाओं के राष्ट्रीय कोच वीरेंद्र दहिया को अंधेरे में रखा गया।

जगमंदर ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘मुझे इस बात की जानकारी भी नहीं है कि ऐसा कोई निर्णय लिया गया है। तदर्थ समिति ने हमें बैठकों के लिए बुलाना बंद कर दिया था। हमने ऐसी कोई सिफारिश नहीं की है, हमने सभी श्रेणियों में ट्रायल कराने का समर्थन किया है।’’

दाहिया ने कहा, ‘‘हमें नहीं पता कि बजरंग और विनेश किस स्थिति में हैं। उन्होंने पिछले आठ महीनों में प्रतिस्पर्धा नहीं की है। आपको गति, ताकत, वजन के बारे में प्रतियोगिताओं के दौरान ही पता चलता है। उन्होंने काफी समय से कोई  प्रतिस्पर्धा नहीं की है। पिछले साल राष्ट्रमंडल खेल और विश्व चैम्पियनशिप के बाद हमने उन्हें खेलते हुए नहीं देखा है।’’

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘ पुरुषों के 65 और महिलाओं के 53 किग्रा भार वर्ग में देश के पास मजबूत युवा खिलाड़ी हैं जो अच्छी प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं। इन खिलाड़ियों की ताकत अच्छी है। तदर्थ समिति ने यह निर्णय लेने से पहले हम से संपर्क नहीं किया।’’

यह पता चला है कि 53 किग्रा और 65 किग्रा में पहलवानों के माता-पिता और कोच निष्पक्ष सुनवाई की मांग को लेकर अदालत का रुख करेंगे।

एक पहलवान के पिता ने बताया, ‘‘हां, हम अदालत जाएंगे। तदर्थ समिति के भेदभावपूर्ण फैसले के कारण हमारे बच्चे क्यों पीड़ित हों। हम केवल निष्पक्ष सुनवाई चाहते हैं।’’

तदर्थ समिति द्वारा ट्रायल के लिए मानदंड तय करने के बाद, यह देखना बाकी है कि संगीत, किन्हा, कादियान और साक्षी चार दिनों के समय में देश लौटने में सक्षम होंगे या नहीं।

संगीता हंगरी में हैं, जहां उन्होंने यूडब्ल्यूडब्ल्यू रैंकिंग सीरीज स्पर्धा में पदक जीता, जबकि साक्षी और कादियान प्रशिक्षण के लिए अमेरिका में हैं। किन्हा ओलंपिक कांस्य पदक विजेता बजरंग के साथी के रूप में किर्गिस्तान में हैं।

तदर्थ पैनल के प्रमुख भूपेंदर सिंह बाजवा से फोन कॉल पर संपर्क करने की कोशिश की गयी लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। परिपत्र में उन्होंने उल्लेख किया, ‘‘ अगर किसी इकाई या एथलीट को चयन ट्रायल निर्देश के खिलाफ कोई शिकायत है, तो संबंधित इकाई और एथलीट तदर्थ समिति को अपनी शिकायत लिख सकते हैं। ’’

भाषा आनन्द पंत

पंत

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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