(तस्वीरों के साथ)
इंफाल, 29 जून (भाषा) जातीय हिंसा प्रभावित मणिपुर के चुराचांदपुर में राहत शिविरों के राहुल गांधी के दौरे को लेकर बृहस्पतिवार को उस वक्त नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला, जब कांग्रेस नेता के काफिले को पुलिस ने बीच रास्ते में ही रोक दिया और उन्हें अपने गंतव्य तक एक हेलीकॉप्टर से जाना पड़ा।
बाद में, शाम में राजधानी इंफाल के ख्वायरमबंद बाजार में हिंसा भड़क उठी, जहां पुलिस को एक शव के साथ एकत्र हुई भीड़ को खदेड़ने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।
गांधी ने इंफाल से 63 किलोमीटर दूर चुराचांदपुर में राहत शिविरों में शरण लिए हुए लोगों से मुलाकात की। उन्होंने कहा, ‘‘मणिपुर में शांति का माहौल हमारी एकमात्र प्राथमिकता होनी चाहिए।’’
गांधी के काफिले को रोके जाने पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली सरकार पार्टी (कांग्रेस) नेता की यात्रा को विफल करने की कोशिश कर रही है। वहीं दूसरी ओर, भाजपा ने दावा किया कि गांधी को हेलीकॉप्टर से जाने के लिए कहा गया था क्योंकि उनकी यात्रा का विभिन्न वर्गों ने विरोध किया था, लेकिन वह सड़क मार्ग से यात्रा करने पर ‘‘अड़े’’ हुए थे।
गांधी ने ट्वीट किया, ‘‘मैं मणिपुर के अपने सभी भाइयों-बहनों को सुनने आया हूं। सभी समुदायों के लोग बहुत स्वागत और प्रेम कर रहे हैं। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार मुझे रोक रही है। मणिपुर को मरहम की जरूरत है। शांति हमारी एकमात्र प्राथमिकता होनी चाहिए।’’
चुराचांदपुर की अपनी यात्रा के दौरान, उन्होंने वहां एक स्कूल और एक कॉलेज में बनाये गये राहत शिविरों में रहने वाले लोगों से बातचीत की। इन राहत शिविरों में लगभग 200 लोग रह रहे हैं।
कांग्रेस नेता को रास्ते में प्रदर्शनों का हवाला देते हुए इंफाल से लगभग 20 किलोमीटर दूर बिष्णुपुर में स्थानीय पुलिस ने रोक दिया।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘‘उनकी सुरक्षा को खतरा है। हम राहुल गांधी को आगे बढ़ने देने का जोखिम नहीं उठा सकते।’’
बड़ी संख्या में महिलाओं समेत कई लोग घटनास्थल के समीप एकत्रित हो गए और उन्होंने राहुल गांधी की यात्रा के समर्थन में तथा विरोध दोनों में प्रदर्शन किए।
गांधी के समर्थकों ने पिछले महीने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरे का हवाला देते हुए उन्हें चुराचांदपुर जाने देने की मांग की।
एक महिला समर्थक ने कहा, ‘‘यदि (केंद्रीय गृह मंत्री) अमित शाह चुराचांदपुर जा सकते हैं, तो राहुल गांधी क्यों नहीं।’’
पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े।
बिष्णुपुर में कुछ घंटों तक फंसे रहने के बाद, गांधी इंफाल हवाई अड्डे पर लौट आए और हेलीकॉप्टर से चुराचांदपुर रवाना हुए।
हवाई अड्डे पर एक सूत्र ने बताया, ‘‘राहुल गांधी ने चुराचांदपुर जाने के लिए राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराये गये हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किया। पुलिस और प्रशासन के शीर्ष अधिकारी हेलीकॉप्टर में उनके साथ थे।’’
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारें गांधी की यात्रा को रोकने के लिए ‘‘निरंकुश तरीकों’’ का इस्तेमाल कर रही हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ट्वीट किया, ‘‘डबल इंजन वाली विनाशकारी सरकारें राहुल गांधी की लोगों तक पहुंच को रोकने के लिए निरंकुश तरीकों का इस्तेमाल कर रही हैं। यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है और सभी संवैधानिक और लोकतांत्रिक मानदंडों को ध्वस्त करता है। मणिपुर को शांति की जरूरत है, टकराव की नहीं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘गांधी राहत शिविरों में पीड़ित लोगों से मिलने और उन्हें सांत्वना देने के लिए वहां जा रहे हैं।’’
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कीशम मेघचंद्र ने आरोप लगाया कि गांधी के काफिले को रोकने का आदेश मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह की ओर से आया था क्योंकि ‘‘हर कोई उनका स्वागत कर रहा था।’’
भाजपा ने हालांकि आश्चर्य जताया कि गांधी चुराचांदपुर हेलीकॉप्टर से क्यों नहीं जाना चाह रहे थे।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा, ‘‘राहुल गांधी की मणिपुर यात्रा का मणिपुर में कई नागरिक समाज संस्थाओं और छात्र संघों ने पुरजोर विरोध किया है। इसे ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने गांधी से हेलीकॉप्टर से चुराचांदपुर जाने का अनुरोध किया।’’
उन्होंने कहा, ‘‘क्षुद्र राजनीतिक लाभ के लिए ‘‘अड़ियल’’ रवैया अपनाने से ज्यादा महत्वपूर्ण है कि संवेदनशील स्थिति को समझा जाये।
स्थानीय पुलिस द्वारा गांधी के काफिले को रोके जाने के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने भी केंद्र पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि यह भाजपा की ‘‘हताशा’’ को दर्शाता है।
टीएमसी के राज्यसभा सदस्य डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा, ‘‘मोदी-शाह की भाजपा अब हताश है। एक महीने पहले ममता बनर्जी ने पत्र लिखकर मणिपुर जाने की इजाजत मांगी थी। उन्हें अनुमति नहीं दी गई। ठीक एक महीने बाद राहुल गांधी को भी जाने से रोक दिया गया। यह निश्चित रूप से भाजपा सरकार के आखिरी 300 दिन हैं।’’
पुलिस सूत्रों ने कहा कि बिष्णुपुर जिले के उटलोऊ गांव के निकट राजमार्ग पर टायर जलाए गए और काफिले पर कुछ पत्थर फेंके गए।
एक पुलिस अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘हमें ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति की आशंका है और इसलिए एहतियातन काफिले को बिष्णुपुर में रुकने का अनुरोध किया था।’’
इस बीच, मणिपुर की राजधानी इंफाल के बीचोंबीच स्थित ख्वायरमबंद बाजार में एकत्र हुई एक भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने बृहस्पतिवार शाम आंसू गैस के गोले छोड़े।
कांगपोकपी जिले में सुबह में हुई गोलीबारी में मारे गये एक व्यक्ति के शव को वहां लाया गया था और एक पारंपरिक ताबूत में रखा गया था।
अधिकारियों ने बताया कि प्रदर्शनकारी एकत्र हुए और भीड़ ने मुख्यमंत्री आवास तक ताबूत के साथ एक जुलूस निकालने की धमकी दी।
उन्होंने बताया कि बाद में पुलिस शव को शहर के जवाहरलाल नेहरू आयुर्विज्ञान संस्थान के मुर्दाघर ले गई।
इससे पहले, कंगपोकपी जिले के हरओठेल गांव में बृहस्पतिवार की सुबह सुरक्षाकर्मियों के साथ मुठभेड़ में दो संदिग्ध दंगाइयों की मौत हो गयी तथा पांच अन्य घायल हो गए।
अधिकारियों ने बताया कि सशस्त्र ‘‘दंगाइयों’’ ने बिना किसी उकसावे के गोलीबारी की थी। सेना ने बताया कि सुरक्षाकर्मियों ने स्थिति को काबू में करने के लिए सुव्यवस्थित तरीके से जवाब दिया।
गौरतलब है कि मणिपुर में मेइती और कुकी समुदाय के बीच मई की शुरुआत में भड़की जातीय हिंसा में 100 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
मणिपुर में अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मेइती समुदाय की मांग के विरोध में तीन मई को पर्वतीय जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के आयोजन के बाद झड़पें शुरू हुई थीं।
मणिपुर की 53 प्रतिशत आबादी मेइती समुदाय की है और यह मुख्य रूप से इंफाल घाटी में रहती है। वहीं, नगा और कुकी जैसे आदिवासी समुदायों की आबादी 40 प्रतिशत है और यह मुख्यत: पर्वतीय जिलों में रहती है।
भाषा
गोला सुभाष
सुभाष
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