(सुदिप्तो चौधरी)
कोलकाता, छह मई (भाषा) नागरिक अधिकार कार्यकर्ता इरोम शर्मिला चानू ने शनिवार को मणिपुर की महिलाओं से संघर्षग्रस्त राज्य में शांति स्थापना के लिए मिलकर काम करने की अपील की।
उन्होंने महिलाओं से कहा कि अपनी जातीय पहचान की परवाह किये बगैर वे राज्य में शांति कायम करने के लिए काम करें।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से भी मणिपुर का दौरा कर ‘‘समस्या को समझने’’ और ‘‘इसका समाधान करने’’ का अनुरोध किया।
शर्मिला को मणिपुर की ‘लौह महिला’ के रूप में जाना जाता है। उन्होंने टेलीफोन पर ‘पीटीआई-भाषा’ को दिये साक्षात्कार में कहा, ‘‘मणिपुर जल रहा है और मैं अपने लोगों की तकलीफों को देखकर बहुत दुखी हूं। मैं सभी मेइती और आदिवासियों से एकजुट होने और हिंसा को खत्म करने की अपील करती हूं। महिलाओं को शांति कायम करने के लिए अपनी ताकत का इस्तेमाल करना चाहिए।’’
मणिपुर में बहुसंख्यक मेइती समुदाय द्वारा उसे अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिए जाने की मांग के विरोध में ‘ऑल ट्राइबल स्टूडेंट यूनियन मणिपुर’ (एटीएसयूएम) की ओर से बुधवार को आयोजित ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के दौरान चुराचांदपुर जिले के तोरबंग क्षेत्र में हिंसा भड़क गई थी।
नगा और कुकी सहित अन्य आदिवासी समुदायों की ओर से इस मार्च का आयोजन मणिपुर उच्च न्यायालय द्वारा पिछले महीने राज्य सरकार को मेइती समुदाय की एसटी दर्जे की मांग पर चार सप्ताह के भीतर केंद्र को एक सिफारिश भेजने का निर्देश देने के बाद किया गया था।
मेइती समुदाय के लोगों को दंगाई भीड़ से बचाने के लिए चुराचंदपुर कस्बे में कुकी महिलाओं द्वारा मानव श्रृंखला बनाने की खबरें आई हैं।
शर्मिला ने कहा कि राज्य में और अधिक सैनिकों को भेजने से स्थिति को सुधारने में मदद नहीं मिलेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री या देश के प्रधान न्यायाधीश से इस समस्या के मूल कारण का पता लगाने और फिर उसका समाधान करने का आग्रह किया।
इरोम शर्मिला ने कहा कि केंद्र सरकार को शेष भारत और पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों के बीच की खाई को पाटने की कोशिश करनी चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘यदि केंद्र सरकार वास्तव में अखंड भारत चाहती है, तो उसे शेष भारत और पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों के बीच की खाई को पाटना होगा।’’
भाषा
देवेंद्र पवनेश
पवनेश
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