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Wednesday, 7 January, 2026
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‘मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता’ को बढ़ावा देने के बीच IIT मद्रास में इस साल चौथी आत्महत्या

महाराष्ट्र निवासी एक सेकेंड ईयर का छात्र फंदे से लटका मिला. भारत में शीर्ष संस्थानों में आत्महत्या का दौर जारी है. सरकार ने कुछ वक्त पहले संसद में बताया था कि 2018 के बाद से IIT में 33 छात्रों ने आत्महत्या की है.

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चेन्नई/नई दिल्ली: अधिकारियों द्वारा मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों पर कल्याण कार्यक्रमों की एक श्रृंखला की घोषणा के बमुश्किल दो दिन बाद शुक्रवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के मद्रास परिसर में एक और छात्र ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली गई.

बीटेक सेकेंड ईयर का छात्र 20 वर्षीय केदार सुरेश शुक्रवार को कावेरी छात्रावास के कमरे में मृत पाए गए, जिससे इस वर्ष संस्थान में आत्महत्या से मरने वालों की संख्या चार हो गई.

सुरेश शुक्रवार को कोट्टूरपुरम पुलिस द्वारा छात्रावास का दरवाजा तोडऩे के बाद पंखे से लटका हुआ मिला था. उसके साथी छात्रों ने जब दरवाजा अंदर से बंद पाया तो उसने अधिकारियों को इसकी जानकारी दी.

पुलिस सूत्रों ने कहा कि छात्र के शव को पोस्टमार्टम के लिए रोयापेट्टा सरकारी अस्पताल भेजा गया है.

संस्थान ने एक आधिकारिक बयान में लड़के की मौत पर शोक व्यक्त करते हुए कहा, ‘तनावग्रस्त छात्रों की सक्रिय रूप से पहचान करने और उनकी मदद करने के लिए सभी संभव उपाय किए जा रहे हैं. हम इन उपायों को मजबूती से लागू करना जारी रखेंगे.’

बयान में यह भी कहा गया है, ’21 अप्रैल 2023 की दोपहर में केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के एक स्नातक छात्र के छात्रावास के कमरे में असामयिक निधन से हमें गहरा दुख हुआ है. संस्थान ने अपना एक अच्छा छात्र खोया है. मौत के कारण का पता नहीं चला है. पुलिस जांच कर रही है. छात्र के अभिभावक को इसकी सूचना दे दी गई है. संस्थान इस दुख की घड़ी में संवेदना व्यक्त करता है और मृत छात्र के मित्रों और परिवार के दुख को साझा करता है. संस्थान सभी से इस कठिन समय में छात्र के परिवार की निजता का सम्मान करने का अनुरोध करता है. दिवंगत आत्मा को शांति मिले.’

19 अप्रैल को, IIT मद्रास ने कहा था कि वह छात्रों के लिए कल्याण कार्यक्रमों की एक श्रृंखला आयोजित करेगा, जिसमें प्रसिद्ध वक्ताओं को मानसिक स्वास्थ्य पर बात करने के लिए आमंत्रित किया जाएगा. कार्यक्रम परिसर में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग, तमिलनाडु सरकार के सहयोग से आयोजित किया जाना था.

31 मार्च को, पश्चिम बंगाल के 32 वर्षीय पीएचडी छात्र सचिन कुमार कॉलेज परिसर के पास एक रिहायशी इलाके वेलाचेरी में अपने घर में फांसी के फंदे से लटके पाए गए थे. पिछले सप्ताह 100 से अधिक छात्रों ने इसको लेकर विरोध प्रदर्शन किया था और इन आत्महत्याओं की एक कमेटी द्वारा जांच की मांग की थी.

दो हफ्ते पहले 14 मार्च को, आंध्र प्रदेश के बी.टेक तृतीय वर्ष के छात्र वी. वैपु पुष्पक श्री साई ने अलकनंदा छात्रावास में अपने कमरे में आत्महत्या कर ली थी. उस समय, IIT मद्रास ने कहा था कि छात्र प्रतिनिधियों सहित हाल ही में गठित एक आंतरिक जांच समिति ऐसी घटनाओं को देखेगी.

13 फरवरी को महाराष्ट्र के 24 वर्षीय रिसर्च स्कॉलर स्टीफन सनी अपने हॉस्टल के कमरे में मृत पाए गए. उसी दिन, एक अन्य छात्र ने आत्महत्या का प्रयास किया लेकिन उसे समय पर रोक लिया गया.

आत्महत्या अन्य आईआईटी को भी प्रभावित करती है. उसी महीने, 18 वर्षीय दर्शन सोलंकी ने IIT बॉम्बे में परिसर की इमारत की सातवीं मंजिल से कूदकर कथित रूप से आत्महत्या कर ली. दर्शन के परिवार, जो एक पिछड़े समुदाय से हैं, ने आरोप लगाया कि उन्हें जाति के कारण बहिष्कृत किया गया था.

मार्च में एक संसदीय सत्र में, शिक्षा मंत्रालय ने सूचित किया कि देश के विभिन्न IIT में 2018 से अब तक 33 छात्रों की आत्महत्या से मृत्यु हो गई है.

संस्थानों में आईआईटी में सबसे ज्यादा मौतें होती हैं, उसके बाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) का स्थान आता है – जिसने इस अवधि में ऐसी 24 मौतों की सूचना दी – और भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएमएस) में चार मौतें हुईं.

आईआईटी में हाल ही में हुई मौतों की बढ़ती संख्या ने मंत्रियों और अधिकारियों सहित कई लोगों को चिंतित कर दिया है. 21 मार्च को, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने छात्रों की भावनात्मक और शारीरिक भलाई पर चर्चा करने के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की. उन्होंने अधिकारियों को छात्रों की मदद के लिए एक रूपरेखा तैयार करने का निर्देश दिया.

उस समय जारी एक बयान में कहा गया था, ‘ढांचा सुरक्षा उपायों और तंत्रों को संस्थागत करेगा जो छात्रों को किसी भी खतरे या हमले से व्यापक सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं – शारीरिक, सामाजिक, भेदभावपूर्ण, सांस्कृतिक और भाषाई; छात्रों के बीच आत्म-नुकसान/आत्म-विनाशकारी प्रवृत्तियों के लिए अग्रणी मनोवैज्ञानिक संकट पैदा करना.

अपनी हालिया बैठक में, IIT परिषद ने भी छात्रों के बीच अवसाद को समझने की कोशिश करते हुए, मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे को उठाया.

बैठक के बाद प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया, ‘आईआईटी गांधीनगर के निदेशक ने छात्रों के बीच अवसाद के पीछे संभावित अंतर्निहित सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और अन्य स्वास्थ्य मुद्दों को प्रस्तुत किया. परिषद ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदमों पर चर्चा की. यह एक मजबूत शिकायत निवारण प्रणाली, मनोवैज्ञानिक परामर्श सेवाओं को बढ़ाने, दबाव को कम करने और छात्रों के बीच विफलता/अस्वीकृति के डर को कम करने के महत्व पर प्रकाश डालने की आवश्यकता पर ध्यान केंद्रित करता है.

(इस ख़बर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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