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Monday, 27 April, 2026
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने गूगल की नयी भुगतान नीति के खिलाफ याचिका पर आदेश सुरक्षित रखा

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नयी दिल्ली, 19 अप्रैल (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि वह ‘पेड ऐप’ डाउनलोड और कमीशन के आधार पर ‘इन-ऐप’ खरीदारी के लिए तीसरे पक्ष के भुगतान प्रोसेसर के इस्तेमाल की अनुमति देने संबंधी गूगल की नीति के खिलाफ ‘एलायंस ऑफ डिजिटल इंडिया फाउंडेशन’ (एडीआईएफ) की याचिका पर आदेश पारित करेगा।

न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला ने याचिकाकर्ता के वकील की दलीलें सुनने के बाद याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिया।

न्यायमूर्ति गेडेला ने कहा, ‘दलीलें सुनी गयीं। आदेश सुरक्षित रखा जाता है।’

याचिकाकर्ता ने दलील दी कि 26 अप्रैल से लागू होने वाली उसकी ‘यूजर चॉइस बिलिंग’ नीति के तहत गूगल तीसरे पक्ष के भुगतान प्रोसेसर के मामले में 11 प्रतिशत या 26 प्रतिशत का सेवा शुल्क लेगा, जो गैर-प्रतिस्पर्धी और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) की ओर से पारित एक आदेश की उपेक्ष करने का प्रयास है।

अदालत को सूचित किया गया कि पिछले साल अक्टूबर में सीसीआई ने 936 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाते हुए गूगल से कहा था कि वह ऐप डेवलपर्स को किसी तीसरे पक्ष की बिलिंग सेवाओं का उपयोग करने की अनुमति दे और उसे प्रतिबंधित न करे, साथ ही कोई भेदभावपूर्ण शर्त न लगाए।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटरमन ने कहा कि सीसीआई सदस्य की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है।

गूगल के वकील ने कई आधारों पर याचिका का विरोध किया और दावा किया कि ‘आवश्यकता के सिद्धांत’ के औचित्यपूर्ण अनुपालन के लिए कोई तथ्य मौजूद नहीं है।

भाषा सुरेश माधव

माधव

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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