जबलपुर, नौ अप्रैल (भाषा) मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को मप्र उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से विवादों के निपटारे के लिए वाद-पूर्व मध्यस्थता का एक मॉडल तैयार करने का आग्रह किया।
वह महाधिवक्ता कार्यालय के नए भवन के शिलान्यास समारोह में बोल रहे थे।
चौहान ने कहा कि वाद-पूर्व मध्यस्थता का मॉडल उनकी सरकार को भेजा जाना चाहिए ताकि इसे राज्य में लागू किया जा सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायत विस्तार (पीईएसए) अधिनियम में ‘शांति निवारण समिति’ के प्रावधान ने पुलिस से संपर्क किए बिना आदिवासियों के बीच छोटे-मोटे विवादों को निपटाने में मदद की है।
उन्होंने कहा, ‘शांति निवारण समिति की सफलता के बाद सरकार चाहती है कि आदिवासी क्षेत्रों के बाहर के गांवों के लिए भी इसी तरह की समिति बनाई जाए, जिसके लिए एक कानूनी ढांचे पर काम करने की जरूरत है।’
चौहान ने कहा कि कार्यालयों के विस्तार की आवश्यकता को पूरा करने के लिए जबलपुर में उच्च न्यायालय की प्रधान सीट के सौध भवन का निर्माण आवश्यक है और इस पर विचार किया जा रहा है।
समारोह में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवि मालिमथ, महाधिवक्ता प्रशांत सिंह, सशस्त्र बल न्यायाधिकरण के अध्यक्ष सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
भाषा रावत नेत्रपाल
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