पुणे, नौ अप्रैल (भाषा) राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी ने रविवार को कहा कि घृणा और ‘‘हिंसक विचारों’’ के खिलाफ अपने मनोपटल में ‘अहिंसा’ को रखकर लड़ना समय की जरूरत है।
उन्होंने ‘‘घृणा के प्रसार’’ और ‘‘नए भारत की दिशा’’ पर भी अफसोस जताया। गांधी ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे देश का राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से बेहतर (उनका हत्यारा नाथूराम) गोडसे होगा।
तुषार गांधी ने कहा, ‘‘हिंसा का विचार ही सबसे खतरनाक हिंसा है। इन दिनों हम देख रहे हैं कि लोगों के दिल में कुछ और है और वे बोलते कुछ और हैं। इसलिए हमें अहिंसा के अर्थ को समझने और उसे अपने दिमाग में आत्मसात करने की जरूरत है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘नया भारत बनने की प्रक्रिया में है लेकिन इसका नेतृत्व घृणा की राजनीति कर रही है जो सबसे बड़ी चिंता है। यहां तक कि महाराष्ट्र में भी हम घृणा का प्रसार होते देख रहे हैं।’’
गांधी ने कहा कि अब नया नारा ‘नफरत भारत छोड़ो’ गढ़ने और घृणा को खत्म करने की जरूरत है, अन्यथा नागरिक इसके गुलाम हो जाएंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘जिस दिशा में नया भारत बढ़ रहा है, उसके राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी नहीं, बल्कि नाथूराम गोडसे होना चाहिए। हमें चिंता करनी चाहिए कि घृणा और ईष्या हमारे दिमाग में जगह बना रही है।’’
तुषार गांधी एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने महात्मा गांधी के बारे में गलत धारणाओं और गलत सूचनाओं की भी निंदा की।
उन्होंने कहा, ‘‘इन दिनों जब भी मेरा फोन बजता है तो मैं सोचता हूं कि अब बापू के बारे में कौन सा सवाल है जिसका उत्तर नहीं दिया गया है। करीब 10 दिन पहले उनकी डिग्री को लेकर सवाल किया गया। महात्मा गांधी के बारे में समझ से परे कई अफवाह फैलाई जा रही हैं।’’
गांधी ने समाज के एक धड़े द्वारा राष्ट्रपिता की हत्या के लिए किए जा रहे ‘वध’ शब्द की भी निंदा की।
भाषा धीरज नेत्रपाल
नेत्रपाल
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