गुवाहाटी, 26 मार्च (भाषा) कांग्रेस की असम इकाई ने रविवार को पार्टी नेता राहुल गांधी को मानहानि के मामले में सजा सुनाए जाने के बाद लोकसभा की सदस्यता से अयोग्य करार दिए जाने के खिलाफ यहां ‘संकल्प सत्याग्रह’ का आयोजन किया।
कांग्रेस द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन में करीब 10 विपक्षी पार्टियों ने हिस्सा लिया। गुवाहाटी में आयोजित विरोध प्रदर्शन में असम कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष देबब्रत सैकिया ने भी हिस्सा लिया।
राज्य की मुख्य पार्टी द्वारा आयोजित धरना प्रदर्शन में रायजोर दल के प्रमुख विधायक अखिल गोगोई और साहित्यकार डॉ. हिरेन गोहैन ने भी अन्य हस्तियों के साथ हिस्सा लिया।
असम प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) द्वारा ‘लोकतंत्र के लिए पैदा किए जा रहे खतरे’ के खिलाफ लोगों को जागरूक करने के लिए गुवाहाटी में पार्टी जनसभा आयोजित करेगी।
उन्होंने कहा, ‘‘हम प्रत्येक जिले, ब्लॉक में लोगों को मौजूदा शासन से लोकतंत्र पर उत्पन्न खतरे के प्रति जागरूक करेंगे। हम प्रत्येक स्थान पर जनसभा करेंगे और जल्द इस मुद्दे पर गुवाहाटी में विशाल रैली करेंगे।’’
बोरा ने बताया कि रायजोर दल, वामपंथी पार्टियां, असम जातीय परिषद, आम आदमी पार्टी (आप) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) सहित विभिन्न विपक्षी पार्टियों ने कांग्रेस का समर्थन किया है।’’
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘उनके (पार्टियों के) प्रतिनिधियों ने भी यहां सत्याग्रह में हिस्सा लिया।’’
केरल की वायनाड संसदीय सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे राहुल गांधी को सूरत की एक अदालत द्वारा 2019 के मानहानि के एक मामले में दो साल जेल की सजा सुनाये जाने के मद्देनजर शुक्रवार को उन्हें लोकसभा की सदस्यता से अयोग्य ठहरा दिया गया। अगर उच्च अदालत सजा को स्थगित नहीं करती तो चार बार के सांसद राहुल गांधी आठ साल तक चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।
सैकिया ने राहुल गांधी के खिलाफ की गई कार्रवाई को ‘लोकतंत्र की हत्या करने की कोशिश ’ करार दिया। उन्होंने कहा, ‘‘हमारा लोकतंत्र ऐसा है जो सभी राजनीतिक पार्टियों को साथ काम करने की अनुमति देता है। लेकिन भाजपा नीत सरकार लोकतंत्र की इस मूल भावना की हत्या करना चाहती है।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा विपक्षी नेताओं के खिलाफ दर्ज 20-30 साल पुराने मामलों को खंगाल रही है और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को इनके खिलाफ इस्तेमाल कर रही हैं।
भाषा धीरज अर्पणा
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