scorecardresearch
Saturday, 11 April, 2026
होमदेशअर्थजगतअनुकूल नीतियों से पवन ऊर्जा क्षमता में सालाना 8,000 मेगावॉट तक की हो सकती है वृद्धि: रिपोर्ट

अनुकूल नीतियों से पवन ऊर्जा क्षमता में सालाना 8,000 मेगावॉट तक की हो सकती है वृद्धि: रिपोर्ट

Text Size:

मुंबई, 20 मार्च (भाषा) नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की अनुकूल नीतियों से पवन ऊर्जा क्षमता में वित्त वर्ष 2025-26 से सालाना 6,000 से 8,000 मेगावॉट तक की वृद्धि हो सकती है। यह पिछले पांच वित्त वर्ष से जारी 1,600 मेगावॉट से अधिक की वृद्धि के मुकाबले लगभग चार गुना ज्यादा है।

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के विश्लेषण के अनुसार, वित्त वर्ष 2017-18 से उलट नीलामी में आक्रामक बोली पवन ऊर्जा में वृद्धि का एक प्रमुख कारण रही है।

इससे कम शुल्क दरों वाली व्यवस्था बनी जो राज्य वितरण कंपनियों के पक्ष में थी। लेकिन रिटर्न को लेकर समझौते से कंपनियों के लिये परियोजनाओं को पूरा करने में प्रोत्साहन पर असर पड़ा। इसके अलावा जमीन अधिग्रहण और पारेषण से जुड़े बुनियादी ढांचा बनने में भी देरी हुई, जिसका असर परियोजनाओं पर पड़ा।

उलट नीलामी (रिवर्स ऑक्शन) के तहत बोलीदाता एक खुले ई-मंच पर प्रतिस्पर्धा करते हैं। सभी प्रतिभागी दिखाई देने वाली उनकी बोली के साथ समयसीमा के भीतर अपनी शुल्क दरें समायोजित करते हैं। वित्त वर्ष 2017-18 से पहले पवन ऊर्जा परियोजनाओं का आवंटन स्थिर शुल्क दरों के आधार पर होता था। इसमें वितरण कंपनियां प्रतिस्पर्धी बोली के बिना दीर्घकालीन अनुबंध के तहत भुगतान तय दरों के आधार पर करती थीं।

रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2017-18 से 2020-21 के बीच सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सेकी) की तरफ से आवंटित परियोजनाओं में से केवल 41 प्रतिशत ही दिसंबर, 2022 तक पूरी हो पाईं। जबकि 23 प्रतिशत रद्द हुईं और शेष परियोजनाओं में जमीन अधिग्रहण और पारेषण तथा आपूर्ति संबंधी बाधाओं के कारण देरी हुई।

जहां सौर क्षमता में 2017-18 से 2021-22 तक औसतन सालाना 8,300 मेगावॉट का इजाफा हुआ, वहीं पवन ऊर्जा के मामले में सालाना केवल 1,600 मेगावॉट की वृद्धि हुई।

रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रालय ने जनवरी में नीतिगत स्तर पर कुछ उपाय किये हैं। इससे स्थिति बदल सकती है।

इनमें से एक सालाना करीब 8,000 मेगावॉट की पवन ऊर्जा परियोजनाओं के लिये निविदा जारी करने का लक्ष्य है। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि पवन ऊर्जा के मामले में निविदा 3,300 मेगावॉट तक ही रही है। इससे क्षमता में तेजी से वृद्धि हो सकती है।

इसके अलावा, मंत्रालय ने उलट नीलामी (रिवर्स) प्रक्रिया में बदलाव किया है। इससे अनुचित बोली पर रोक लगेगी। एजेंसी को उम्मीद है कि हाल की 2.89-2.94 रुपये प्रति यूनिट की बोली पर शुल्क दरों में 20 से 30 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। बोली प्रक्रिया में बदलाव से कंपनियों को 10 प्रतिशत से अधिक आंतरिक रिटर्न मिलेगा।

भाषा

रमण अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments