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नयी दिल्ली, 19 मार्च (भाषा) कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान ‘‘महिलाओं के यौन उत्पीड़न’’ से जुड़े अपने बयान के संबंध में दिल्ली पुलिस के नोटिस का रविवार को प्रारंभिक जवाब भेजा और 45 दिन की देरी के बाद अचानक की गई कार्रवाई पर सवाल उठाया।
सूत्रों ने बताया कि पिछले पांच दिन में पुलिस के तीसरी बार राहुल गांधी के आवास पर पहुंचने के कुछ घंटे बाद कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने चार पन्नों के अपने जवाब में 10 बिंदुओं का उल्लेख किया है। साथ ही कांग्रेस नेता की 30 जनवरी की टिप्पणी को लेकर दिल्ली पुलिस के नोटिस का विस्तृत जवाब देने के लिए 8-10 दिनों का समय मांगा है।
इससे पहले, दिल्ली पुलिस की एक टीम ‘‘महिलाओं के यौन उत्पीड़न’’ के संबंध में राहुल गांधी द्वारा ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान की गई टिप्पणी को लेकर उन्हें जारी नोटिस के सिलसिले में रविवार को यहां उनके आवास पर पहुंची।
कांग्रेस ने दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई की निंदा की और इसे ‘‘राजनीतिक प्रतिशोध और उत्पीड़न’’ का सबसे खराब उदाहरण करार दिया। वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पुलिस ‘अपने वैध कर्तव्य का पालन कर रही है।’’
अधिकारियों के अनुसार, विशेष पुलिस आयुक्त (कानून व्यवस्था) सागर प्रीत हुड्डा के नेतृत्व में पुलिस दल सुबह करीब 10 बजे राहुल के 12, तुगलक लेन स्थित आवास पर पहुंचा और करीब दो घंटे बाद गांधी से मिल सका। पुलिस बल अपराह्न करीब एक बजे वापस लौट गया।
राहुल गांधी के आवास के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। पुलिस टीम जब राहुल गांधी के आवास के अंदर ही थी, उसी दौरान पवन खेड़ा, अभिषेक मनु सिंघवी, जयराम रमेश सहित कई कांग्रेस नेता वहां पहुंचे।
दिल्ली पुलिस के कदम के खिलाफ कांग्रेस कार्यकर्ताओं के एक समूह ने बाहर नारेबाजी की। एक अधिकारी ने बताया कि चार-पांच कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया और उन्हें नजदीकी थाने ले जाया गया एवं बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।
पुलिस के मुताबिक, राहुल ने अपनी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान श्रीनगर में बयान दिया था, “मैंने सुना है कि महिलाओं का अब भी यौन उत्पीड़न हो रहा है।” पुलिस के अनुसार, यात्रा दिल्ली से भी गुजरी थी और वे पता लगाना चाहते हैं कि क्या किसी पीड़ित ने यहां कांग्रेस नेता से संपर्क किया था, ताकि वे मामले की जांच शुरू कर सकें।
अधिकारियों ने बताया कि पुलिस ने कांग्रेस नेता से इन पीड़ितों का विवरण देने को कहा था, ताकि उन्हें सुरक्षा मुहैया कराई जा सके।
विशेष पुलिस आयुक्त हुड्डा ने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा कि राहुल गांधी की टिप्पणी के बाद, उन्होंने विवरण प्राप्त करने के लिए स्थानीय स्तर पर जांच की कि यात्रा के दिल्ली चरण के दौरान क्या किसी महिला ने राहुल गांधी से संपर्क किया था या नहीं।
उन्होंने कहा, ‘लेकिन हमारे अधिकारियों के संज्ञान में ऐसी कोई घटना नहीं आई और न ही हमें कोई पीड़िता मिली।’
हुड्डा ने कहा कि जब उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं मिली तो उन्होंने खुद ही कांग्रेस नेता से संपर्क करने का फैसला किया और उसके बाद एक प्रश्नावली के साथ एक नोटिस उन्हें भेजा गया। नोटिस में उन पीड़ितों का विवरण मांगा गया था, जिन्होंने यौन उत्पीड़न को लेकर उनसे संपर्क किया था।
हुड्डा ने कहा, ‘हमने उनसे (राहुल गांधी से) संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन वह उस समय विदेश में थे। इसलिए, आज मैं अपनी टीम के साथ उनके आवास पर गया और उनके स्टाफ को इस बारे में बताया।’
उन्होंने कहा कि उन्होंने राहुल गांधी से मुलाकात की और उनसे विवरण देने का आग्रह किया।
पुलिस ने कहा कि यह तीसरा अवसर था, जब राहुल गांधी से इस बारे में संपर्क किया गया।
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने पुलिस के इस कदम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की और आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को निशाना बनाने के लिए अपनी एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है।
पुलिस कार्रवाई पर निशाना साधते हुए यहां कांग्रेस मुख्यालय में एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन के दौरान पार्टी नेताओं-अशोक गहलोत, जयराम रमेश और अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष के खिलाफ माहौल बनाने का यह कदम ‘‘प्रतिशोध, धमकी और उत्पीड़न’’ का एक स्पष्ट उदाहरण है।
राजस्थान के मुख्यमंत्री गहलोत ने जोर देकर कहा कि केंद्र राजनीतिक अभियानों के दौरान विपक्षी नेताओं के बयानों पर मामले दर्ज करके एक गलत उदाहरण पेश कर रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह भाजपा नेताओं को भी उन राज्यों में की गई टिप्पणियों पर समान कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है, जो उसके (भाजपा) द्वारा शासित नहीं हैं।
गहलोत ने कहा कि अगर केंद्रीय मंत्री चुनाव के दौरान विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों में इसी तरह की टिप्पणी करते हैं, तो उन्हें दिल्ली पुलिस की तरह की कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
सिंघवी ने कहा कि जिस बयान को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं, वह बयान राहुल गांधी ने 30 जनवरी को श्रीनगर में दिया था, इसलिए यह दिल्ली पुलिस के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है।
उधर, भाजपा ने कहा कि राहुल गांधी को पुलिस द्वारा मांगी गई जानकारी देनी चाहिए ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके।
भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि पुलिस को उन घटनाओं की जानकारी होनी चाहिए, जिनका दावा राहुल गांधी ने किया था। उन्होंने कहा कि इसीलिए दिल्ली पुलिस ने विवरण प्राप्त करने के लिए कांग्रेस नेता से मिलने की खातिर कानूनी प्रक्रिया का पालन किया है।
उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि पार्टी अब दावा कर रही है कि पुलिस की वैध कार्रवाई को लेकर ‘लोकतंत्र खतरे में है’।
भाजपा के सूचना एवं प्रौद्योगिकी (आईटी) प्रकोष्ठ के प्रभारी अमित मालवीय ने ट्वीट किया, ‘यह मानते हुए कि उन्होंने तब गलत नहीं बोला था, न्याय सुनिश्चित करने के प्रति उनकी कमजोर प्रतिबद्धता झलकती है।’’
भाषा शफीक अविनाश दिलीप
दिलीप
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