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Monday, 23 March, 2026
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रियल एस्टेट परियोजनाओं को पूरा करने के लिए बैंकों को बिल्डर में तब्दील नहीं किया जा सकता : अदालत

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नयी दिल्ली, 16 मार्च (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि रियल एस्टेट परियोजनाएं पूरी हों, यह सुनिश्चित करने के लिए बैंकों को डेवलपर और बिल्डर या प्राधिकरण में तब्दील नहीं किया जा सकता है।

उच्च न्यायालय ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी परिपत्र में बैंकों को ऑडिटर नियुक्त करने की सलाह दी गई है, ताकि वे जांच कर सके कि उनके द्वारा दिए गए ऋण का दुरुपयोग तो नहीं हो रहा है और बैंक केवल कर्जदार को दुरुपयोग के प्रति आगाह कर सकते हैं।

अदालत ने कहा कि यह कर्जदार पर है कि वह तय समय में परियोजना पूरी करने के लिए दीवानी मंच पर जाकर उचित कानूनी कार्रवाई करे।

मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने कहा, ‘‘यह नहीं कहा जा सकता कि यह बैंक की जिम्मेदारी है कि परियोजना पूरी हो और बैंक परियोजना पूरी करने के लिए बिल्डर की भूमिका नहीं निभा सकता।’’

यह फैसला अदालत की पहल पर दाखिल याचिका पर आया है जो एक पत्र पर आधारित थी। पत्र में अदालत से अनुरोध किया गया था कि वह केंद्र सरकार को निर्देश दे कि ऋण लेकर मकान खरीदने वालों की शिकायतों पर गौर करने के लिए एक विस्तृत योजना बनाए।

भाषा धीरज सुरेश

सुरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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