कोलकाता, 13 मार्च (भाषा) तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को कथित तौर पर निशाना बनाने के लिए ‘‘केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग’’ के खिलाफ सोमवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित किया गया।
हालांकि, भाजपा ने यह दावा करते हुए सदन से बहिर्गमन किया कि प्रस्ताव पढ़े जाने के समय विधानसभा में उसके सदस्यों की उपस्थिति ‘भ्रष्टाचार के मामलों का समर्थन करने के समान’ होगी।
पश्चिम बंगाल विधानसभा में यह प्रस्ताव टीएमसी के वरिष्ठ विधायक तापस रॉय ने प्रक्रिया और कार्य संचालन नियमों के नियम 185 के तहत पेश किया।
विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के इस दावे का जिक्र करते हुए कि मंत्री पार्थ भौमिक को एक महीने के भीतर सलाखों के पीछे डाल दिया जाएगा, रॉय ने कहा कि देश 2014 से नेताओं को परेशान करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का व्यापक पैमाने पर दुरुपयोग देख रहा है।
भौमिक ने अधिकारी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पेश किया था।
रॉय ने कहा, ‘‘हमने देखा है कि विपक्ष के नेता ने मंत्रियों सहित राज्य की सत्ताधारी पार्टी के सदस्यों को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी।’’
प्रस्ताव पर बोलते हुए, राज्य की मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो टीएमसी के नेताओं और पदाधिकारियों को चुनिंदा तरीके से लक्षित कर रहे हैं और भय का माहौल बना रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘उनका एकमात्र मकसद टीएमसी की छवि धूमिल करना है। भाजपा हमसे राजनीतिक रूप से नहीं लड़ सकती, इसलिए वह हमारे खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है।’’
बाद में संवाददाताओं से बात करते हुए भाजपा के मुख्य सचेतक मनोज तिग्गा ने कहा कि आरोप निराधार हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हम बाहर चले गए, क्योंकि हमें लगता है कि वहां रहना, टीएमसी जो कह रही है, उसका समर्थन करने के बराबर है, जो झूठ के अलावा और कुछ नहीं है।’’
भाषा अमित दिलीप
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