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Wednesday, 25 February, 2026
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नगालैंड में ‘विपक्ष रहित’ सरकार का बनना लोकतंत्र का उपहास होगा: राजनीतिक विश्लेषक

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(नारायण बहादुर)

कोहिमा, 12 मार्च (भाषा) नगालैंड के एक ‘विपक्ष-रहित’ सरकार की ओर बढ़ने के बीच राज्य के राजनीतिक विश्लेषकों और टिप्पणीकारों ने इसे लोकतंत्र का मजाक बताते हुए इस व्यवस्था की आलोचना की है।

नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (एनडीपीपी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 40 और 20 के अनुपात में सीट बंटवारा करके नगालैंड विधानसभा चुनाव लड़ा था और लगातार दूसरे कार्यकाल के लिए बहुमत हासिल कर सत्ता बरकरार रखी।

नगालैंड में लगभग सभी दल एनडीपीपी-भाजपा गठबंधन को समर्थन दे रहे हैं जिससे यह राज्य विपक्ष मुक्त होने की ओर बढ़ रहा है।

राजनीतिक विश्लेषक जोनास यांथन के अनुसार, एनडीपीपी-भाजपा गठबंधन को समर्थन देने वाले दलों के पास ‘‘उन लोगों के लिए कोई एजेंडा नहीं है जो अपने नेताओं पर भरोसा करते हैं, और अपने स्वयं के स्वार्थों को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं।’’

यांथन ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘विधानसभा में विपक्षी सदस्यों के बिना विधानसभा में जनता की चिंताओं को कौन उठाएगा?’’

उन्होंने यह भी कहा कि पार्टियों का दावा है कि वे नगा शांति वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए सरकार का समर्थन करेंगे जो एक ‘‘राजनीतिक नाटक’’ है।

सामाजिक कार्यकर्ता निकेतु इरालू ने कहा कि वह ‘विपक्ष-रहित’ सरकार के विचार से सहमत नहीं हैं, जिसे उन्होंने ‘राय-विहीन’ बताया।

वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक एच. चिशी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि ‘विपक्ष रहित’ सरकार का प्रस्ताव ‘निहित स्वार्थों के लिए सत्ता में आने का एक राजनीतिक हथकंडा’ है।

चिशी ने कहा, ‘‘हमारे पास अतीत में ‘विपक्ष-रहित’ सरकारें रही हैं, लेकिन उन्होंने क्या दिया है? यह अलोकतांत्रिक है और केंद्र सरकार को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए।’’

नगालैंड विधानसभा चुनाव के नतीजे दो मार्च को घोषित किये गये थे जिसमें चुनाव पूर्व हुए गठबंधन के दो सहयोगियों एनडीपीपी-भाजपा ने क्रमश: 25 और 12 सीट पर जीत दर्ज कर कुल 37 सीट प्राप्त की थी।

मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने हाल में संवाददाताओं से कहा था कि ‘विपक्ष-रहित’ सरकार की स्वीकृति पर अंतिम निर्णय भाजपा के साथ उचित परामर्श के बाद ही लिया जाएगा।

नगालैंड की भाजपा इकाई के अध्यक्ष तेमजेन इमना अलॉन्ग ने कहा, ‘‘यदि ऐसी किसी चीज की जरूरत है तो हमारे मुख्यमंत्री और भाजपा के केंद्रीय नेताओं को विचार-विमर्श करके फैसला करना होगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, हमने किसी भी राजनीतिक दल को समर्थन पत्र देने के लिए नहीं कहा।’’

भाषा

देवेंद्र संतोष

संतोष

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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