scorecardresearch
Tuesday, 31 March, 2026
होमदेशजीवनशैली में बदलाव कर गुर्दे की बीमारी को रखा जा सकता है दूर: विशेषज्ञ

जीवनशैली में बदलाव कर गुर्दे की बीमारी को रखा जा सकता है दूर: विशेषज्ञ

Text Size:

नयी दिल्ली, 10 मार्च (भाषा) जीवनशैली में बदलाव करके गुर्दे (किडनी) की बीमारी को दूर रखा जा सकता है और शुरुआती चरण में ही इस रोग पर काबू पाया जा सकता है। विशेषज्ञों ने एक कार्यक्रम में यह बात कही।

सफदरजंग अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. हिमांशु वर्मा ने बताया कि गुर्दे की बीमारी होने से लेकर इसके पूरी तरह से खराब होने के बीच पांच चरण होते हैं। पहले और दूसरे चरण में बीमारी पर पूरी तरह से काबू पाना संभव है। बीमारी पर काबू पाने के लिए समय पर जांच कराना सबसे जरूरी है ताकि शुरूआती चरण में ही इसका पता लगाया जा सके।

डॉ. वर्मा ने एमिल फार्मास्युटिकल की तरफ से आयोजित किडनी मंथन कार्यक्रम में यह बात कही। विश्व गुर्दा दिवस के मौके पर एक से नौ मार्च तक डिजिटल माध्यम से किडनी मंथन कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें देश भर के एलोपैथी और आयुर्वेद के 35 विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।

डॉ. वर्मा ने बताया कि बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 20-25 के बीच रखने, सप्ताह में पांच दिन रोजाना 30 मिनट सैर करने, खानपान की शैली में बदलाव करके, ज्यादा नम और पोटेशियम युक्त भोजन के सेवन, दर्द निवारक दवाओं के सेवन में सावधानी बतरने, तीन लीटर से कम पानी पीने, धूम्रपान छोड़ने से बीमारी को शुरुआती चरण में काबू किया जा सकता है।

विशेषज्ञों ने कहा कि भारत में गुर्दे के मरीजों की संख्या हर साल तेज गति से बढ़ रही है। ऐसे में एलोपैथी के साथ-साथ आयुर्वेद उपचार से गुर्दे की बीमारी को दूर किया जा सकता है।

विशेषज्ञों ने कहा, ”आयुर्वेद में इसके लिए कई औषधियों का जिक्र है। इनमें पुनर्नवा, गोखरू, वरुण, कासनी, मकोय, पलाश व गिलोय इत्यादि का जिक्र मिलता है और इनपर अब तक कई वैज्ञानिक अध्ययन भी किए गए हैं। ‘नीरी केएफटी’ इसी का परिणाम है, जिसमें 19 जड़ी बूटियों का मिश्रण है।’

भाषा जोहेब सुभाष

सुभाष

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments